रेलवेकर्मी आपात स्थिति में किसी भी अस्पताल में करा सकते हैं इलाज

जबलपुर. रेलवे के लाखों कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके आश्रितों के लिए राहत भरी खबर है. रेलवे बोर्ड ने रेलवे चिकित्सा उपस्थिति नियम (आरएमएआर)-2013 के तहत आपातकाल की परिभाषा में बड़ा बदलाव किया है. अब 12 तरह की आपात स्थितियों में इलाज के लिए रेलवे डॉक्टर या रेलवे अस्पताल से रेफरल पत्र लेने की अनिवार्यता नहीं रहेगी.
मरीज बिना देरी के नजदीकी सरकारी या निजी अस्पताल में भर्ती होकर इलाज करा सकेंगे. अस्पताल का रेलवे से टाईअप हो या नहीं. इलाज के बाद नियमानुसार चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति (रीइम्बर्समेंट) रेलवे करेगा. रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं.
नए आदेश के बाद आपात स्थिति में मरीज को टाईअप अस्पताल खोजने की जरूरत नहीं होगी. वह सबसे नजदीकी सरकारी या निजी अस्पताल में तत्काल इलाज शुरू करा सकेगा. इससे गंभीर मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा. सामान्य मामलों में रेलवे अस्पताल में इलाज कराना होगा. रेलवे के पूर्व यातायात निरीक्षक अशोक कटारे ने बताया. आपात स्थितियों में रेलकर्मियों, उनके परिवारों, पेंशनरों, उनके परिवारों को रेलवे से टाईअप वाले अस्पताल में जाने के लिए अब रेफरल की जरूरत नहीं है.
इमरजेंसी में उन्हें अस्पताल में सीधे भर्ती कराया जा सकता है. अस्पताल ही रेफरल की प्रक्रिया करेगा. रेलवे से टाईअप नहीं होने वाले अस्पताल में इलाज कराने पर भी मरीज अस्पताल के बिल, डिस्चार्ज समरी, डॉक्टर की रिपोर्ट, अन्य आवश्यक दस्तावेज रेलवे में जमा कर चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति प्राप्त कर सकेगा. रेलवे बोर्ड के आदेश के अनुसार, नियम 601(4) में संशोधन कर आपातकाल की परिभाषा का दायरा बढ़ाया है. इसमें एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम (हार्ट अटैक), अचानक बेहोशी, शरीर के किसी भी अंग में अचानक कमजोरी या लकवा, सांस लेने में गंभीर कठिनाई, गंभीर चोट, आघात या सड़क दुर्घटना, अचानक और गंभीर दर्द, प्रसव या गर्भावस्था से संबंधित आपात स्थिति, किसी भी प्रकार का रक्तस्राव, पेट में गंभीर दर्द, उल्टी या निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) के साथ दस्त, सांप या जहरीले कीड़े के काटने अथवा जहर खाने के मामले, जलने या बिजली का करंट लगने की घटनाएं, चिकित्सक द्वारा प्रमाणित कोई भी अन्य जानलेवा स्थिति शामिल की गई हैं. इससे इमरजेंसी में मरीज को तुरंत उपचार मिल सकेगा.













