जी-2 मॉल के ‘तीन गुना’ अवैध निर्माण पर चलेगा निगम का डंडा; हाई कोर्ट से भी नहीं मिली राहत

सिंगरौली: शहर के विंध्यनगर-बैढ़न मुख्य मार्ग (ढोटी) पर स्थित गंगोत्री-2 (जी-2) मॉल के महा-अवैध निर्माण को लेकर नगर निगम का एक्शन और तेज हो गया है। निगम द्वारा जारी ध्वस्तीकरण के अंतिम नोटिस के खिलाफ राहत पाने हाई कोर्ट (जबलपुर) की शरण में गए मॉल संचालक ताराचंद्र कारीवाल को तगड़ा झटका लगा है। माननीय न्यायालय ने अवैध निर्माण पर कोई भी अंतरिम राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि संचालक अपने वैध दस्तावेज निगम कमिश्नर के पास जमा करें और कमिश्नर इस पूरे मामले पर 60 दिनों के भीतर अंतिम फैसला लें।
नक्शा 1200 का, तान दी 3800 वर्गमीटर की बिल्डिंग
नगर निगम की कड़क कमिश्नर श्रीमती सविता प्रधान द्वारा की गई जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मॉल संचालक को केवल 1232.92 वर्गमीटर क्षेत्र में ही व्यावसायिक निर्माण की मंजूरी मिली थी। लेकिन नियमों को ताक पर रखकर मौके पर 3840 वर्गमीटर में विशाल साम्राज्य खड़ा कर लिया गया, जो स्वीकृत नक्शे से सीधे तीन गुना ज्यादा है। स्थानीय सजग नागरिकों की शिकायत के बाद जब निगम ने पैमाइश कराई, तब इस बड़े खेल का पर्दाफाश हुआ।
नया नियम पड़ेगा भारी, अब नहीं होगी कम्पाउंडिंग:
नगर निगम प्रशासन ने साफ कर दिया है कि म.प्र. नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 308-क में 13 मार्च 2024 को हुए नए संशोधन के बाद अब 10 फीसदी से ज्यादा के अवैध निर्माण को वैध (शमन) नहीं किया जा सकता। जी-2 मॉल का अवैध हिस्सा निर्धारित सीमा से बेहद बाहर है, इसलिए इसका टूटना लगभग तय माना जा रहा है।
निगम ने थमाया था 7 दिन का अल्टीमेटम, बुलडोजर का खर्च भी भुगतना होगा
निगम कमिश्नर ने संचालक को सख्त हिदायत दी थी कि 7 दिनों के भीतर वे इस अनाधिकृत ढांचे को खुद ही हटा लें। चेतावनी यह भी है कि यदि नगर निगम को अपनी जेसीबी और दस्ता भेजकर इसे तोड़ना पड़ा, तो मलबे को हटाने और तोड़ने का पूरा खर्च संचालक से ‘भू-राजस्व’ (जमीन की कुर्की की तर्ज पर) की तरह वसूला जाएगा। इसी कार्रवाई के डर से संचालक दिल्ली-जबलपुर की दौड़ लगा रहे थे, लेकिन अदालत ने भी नियम विरुद्ध निर्माण को संरक्षण नहीं दिया।
शहर में कौतूहल: क्या 60 दिन बाद जमींदोज होगा जी-2 मॉल का अवैध हिस्सा?
कमिश्नर श्रीमती सविता प्रधान की इस ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति से शहर के रसूखदार बिल्डरों और रसूखदारों के पसीने छूट रहे हैं। अब सिंगरौली के चौक-चौराहों पर सिर्फ एक ही चर्चा आम है कि हाई कोर्ट द्वारा दी गई 60 दिनों की समय सीमा के भीतर दस्तावेज पेश न कर पाने की सूरत में क्या जी-2 मॉल के इस अवैध हिस्से को जमींदोज कर दिया जाएगा? फिलहाल, इस कार्रवाई ने शहर के अन्य नियम विरुद्ध कब्जाधारियों की भी नींद उड़ा दी है।













