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विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा को लेकर में सीईओ जिला पंचायत की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित

सिंगरौली 15 जून 2026/ कलेक्ट्रेट सभागार में मुख्य कार्यपालन जिला पंचायतश्री जगदीश गोमे की अध्यक्षता विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा को लेकर समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण के संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना था।
बैठक में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसलों पर चर्चा करते हुए बताया गया कि मानसिक स्वास्थ्य संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। अब जिले के सभी सरकारी व निजी स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों के लिए एक समान मानसिक स्वास्थ्य नीति लागू करना अनिवार्य होगा। इसके तहत 100 या अधिक विद्यार्थियों वाले प्रत्येक संस्थान में कम से कम एक प्रमाणित परामर्शदाता या मनोवैज्ञानिक की नियुक्ति की जाएगी, जो बच्चों की समस्याओं को पूरी तरह गोपनीय रखकर उनका समाधान करेंगे।

विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध परामर्श सेवाओं, मनोवैज्ञानिक सहायता और मेंटरिंग व्यवस्था की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे छोटे छात्र-समूहों के लिए समर्पित मेंटर्स (शिक्षकों) की जिम्मेदारी तय करें, जो विशेषकर परीक्षा के दिनों में बच्चों की निगरानी करेंगे। यदि कोई विद्यार्थी गहरे अवसाद या गंभीर मानसिक संकट में पाया जाता है, तो उसे तुरंत जिला अस्पताल या विशेषज्ञों के पास भेजने के लिए एक त्वरित प्रतिक्रिया और मजबूत रेफरल तंत्र स्थापित किया गया है, ताकि समय रहते उचित इलाज मिल सके।परीक्षा के कारण होने वाले तनाव, अवसाद, चिंता और आत्महत्या जैसी दुखद प्रवृत्तियों को रोकने के लिए जिले के सभी संकुलों में एक सघन जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही युवाओं को नशे की लत से बचाने और उनमें विपरीत परिस्थितियों से लड़ने की क्षमता विकसित करने के लिए ‘जीवन-कौशल विकास’ से जुड़े विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। बच्चों की शिकायतों, भावनात्मक चुनौतियों और मनोसामाजिक समस्याओं के त्वरित एवं सुरक्षित समाधान के लिए जिला स्तर पर एक विशेष निगरानी समिति का गठन भी किया गया है। यह समिति परिसरों में रैगिंग, बुलिंग और प्रदर्शन के आधार पर बच्चों के साथ होने वाले किसी भी मानसिक उत्पीड़न को सख्ती से रोकेगी।

बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि बच्चों पर उम्मीदों का अत्यधिक बोझ न डालने के लिए अभिभावकों के साथ नियमित संवाद सत्र आयोजित किए जाएं। इसके साथ ही साल में कम से कम दो बार सभी शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ को “साइकोलॉजिकल फर्स्ट एइड” और बच्चों में तनाव के शुरुआती लक्षणों को पहचानने का अनिवार्य प्रशिक्षण दिया जाएगा। सीईओ जिला पंचायत ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय की गाइडलाइंस का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई होगी। सभी हॉस्टलों और कोचिंग संस्थानों में राष्ट्रीय हेल्पलाइन (जैसे टेली-मानस) के नंबर प्रदर्शित करना और आत्म-हानि को रोकने के लिए एंटी-सुसाइड सीलिंग फैन व सुरक्षा ग्रिल लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।

माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, शैक्षणिक प्रदर्शन या अंकों के आधार पर विद्यार्थियों का अलग बैच (सेग्रिगेशन) बनाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। किसी भी विद्यार्थी को कम अंक आने पर कक्षा या सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा या प्रताड़ित नहीं किया जा सकता। हर संस्थान में प्रशिक्षित काउंसलर की मौजूदगी और उनके पास आने वाले बच्चों की गोपनीयता बनाए रखना कानूनी रूप से अनिवार्य है। केवल पढ़ाई के दबाव को कम करने के लिए खेलकूद, कला और मनोरंजन की गतिविधियों के लिए समय निर्धारित करना आवश्यक है। इसके अलावा, संस्थान के भीतर या हॉस्टल में किसी भी प्रकार की रैगिंग, बुलिंग या लैंगिक/जातिगत भेदभाव पर तत्काल शिकायत और निवारण की पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। बैठक के दौरान नगर निगम आयुक्त सविता प्रधान, जिला शिक्षा अधिकारी एसबी सिंह, महिला बाल विकास अधिकारी जीतेन्द्र गुप्ता, डॉ प्रियंका तिवारी, जिला पंचायत के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी अरविंद डामोर सहित संबंधित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

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