नर्मदा नदी में 11 हजार लीटर दूध बहाने के मामले में एनजीटी सख्त, प्रदूषण रोकने निगरानी के निर्देश

भोपाल। नर्मदा नदी के संरक्षण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की भोपाल पीठ ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। नर्मदा नदी में बड़ी मात्रा में दूध और अन्य सामग्री प्रवाहित किए जाने के मामले में एनजीटी ने मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) को धार्मिक आयोजनों के दौरान घाटों पर निगरानी रखने और जल प्रदूषण रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला सीहोर जिले की नसरुल्लागंज (भेरुंदा) तहसील के ग्राम सातदेव का है। यहां एक धार्मिक आयोजन के दौरान नर्मदा नदी में करीब 11 हजार लीटर दूध और 210 साड़ियां प्रवाहित किए जाने का मामला सामने आया था। इस मामले को लेकर अधिवक्ता सुमित शर्मा और सिद्धार्थ राजपूत ने एनजीटी में याचिका दायर की थी।
याचिका में बताया गया कि इतनी अधिक मात्रा में दूध नदी में बहाने से जल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। दूध जैविक पदार्थ होने के कारण पानी में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा को कम कर सकता है, जिससे मछलियों सहित अन्य जलीय जीवों के जीवन पर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
सुनवाई के दौरान एनजीटी ने वैज्ञानिक तथ्यों और रिपोर्टों का अवलोकन करते हुए माना कि कम प्रवाह वाले जल क्षेत्रों में अत्यधिक मात्रा में दूध या अन्य जैविक सामग्री प्रवाहित करना पर्यावरण के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
एनजीटी ने एमपीपीसीबी और स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में नर्मदा घाटों पर होने वाले धार्मिक आयोजनों के दौरान सतर्कता बरती जाए। नदी में ऐसी सामग्री प्रवाहित करने पर रोक लगाने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
अधिवक्ता सुमित शर्मा और सिद्धार्थ राजपूत की ओर से की गई पैरवी के बाद आए इस निर्णय को नर्मदा नदी संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।













