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मकान गिराने के आरोपों पर एनसीएल जयंत का स्पष्टीकरण, कहा- दस्तावेज न मिलने से अटका है मुआवजा भुगतान

 

सिंगरौली। एनसीएल जयंत परियोजना ने बिना प्रतिकर भुगतान के मकान गिराए जाने संबंधी मीडिया में प्रसारित खबरों पर तथ्यात्मक स्पष्टीकरण जारी किया है। परियोजना प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि संबंधित मामले में मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया आवश्यक दस्तावेजों के अभाव में लंबित है और परियोजना द्वारा किसी भी मकान को जबरन नहीं गिराया गया है।

जारी विज्ञप्ति के अनुसार मामला ग्राम मढ़ोली निवासी स्वर्गीय बिट्टन बियार के परिवार से संबंधित है, जिनकी भूमि एवं उस पर स्थित परिसंपत्तियों का अधिग्रहण जयंत परियोजना के लिए वर्ष 2011 में सीबीए (एंड डी) एक्ट 1957 के तहत किया गया था। परियोजना प्रबंधन ने बताया कि स्वर्गीय बिट्टन बियार को स्वीकृत भूमि मुआवजा राशि का भुगतान किया जा चुका है। उनकी मृत्यु के बाद शेष देय राशि का भुगतान वैध वारिसों को आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के बाद किया जाना है।

एनसीएल ने स्पष्ट किया कि परियोजना की निर्धारित प्रक्रिया के तहत गृहस्वामी स्वयं अपना मकान हटाकर परियोजना को अधिपत्य सौंपता है, जिसके बाद मुआवजा एवं पुनर्वास लाभ दिए जाते हैं। प्रबंधन का दावा है कि स्वर्गीय बिट्टन बियार के अन्य परिजनों ने प्रक्रिया का पालन करते हुए अपने मकानों का अधिपत्य सौंपा था और उन्हें नियमानुसार मुआवजा तथा पुनर्वास लाभ प्राप्त हो चुके हैं।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि श्री छोटे बियार एवं उनकी पत्नी को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए कई बार लिखित नोटिस जारी किए गए तथा मौखिक रूप से भी अवगत कराया गया, लेकिन अब तक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। इसी कारण मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो सकी है।

एनसीएल जयंत प्रबंधन ने कहा है कि आवश्यक दस्तावेज प्राप्त होते ही नियमानुसार आगे की कार्रवाई कर देय मुआवजा भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।

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