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हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला, पति-पत्नी के बीच बलात्कार और अप्राकृतिक कृत्य के आरोप निरस्त

ग्वालियर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए पति-पत्नी के बीच चल रहे आपराधिक मामले में बलात्कार और अप्राकृतिक कृत्य के आरोपों को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यदि पत्नी बालिग है, तो पति द्वारा वैवाहिक संबंधों में किए गए यौन संबंध को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375 के अपवाद के तहत बलात्कार नहीं माना जा सकता है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में धारा 377 के तहत भी अभियोजन नहीं चलाया जा सकता, क्योंकि यह आरोप वैवाहिक संबंधों के बीच और एक विवाद के परिणामस्वरूप लगाए गए हैं। हालांकि, अदालत ने यह भी बताया कि पति के खिलाफ क्रूरता, मारपीट और अश्लीलता के आरोप यथावत रहेंगे, और इन पर ट्रायल जारी रहेगा।

यह मामला मुरैना जिले के कोतवाली थाना में दर्ज अपराध से जुड़ा है। पत्नी ने अपने पति पर दहेज उत्पीड़न, मारपीट, बलात्कार और अप्राकृतिक कृत्य जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। इसके आधार पर पुलिस ने चार्जशीट पेश की थी, और मुरैना के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ने संज्ञान लिया था। इसके बाद, पति ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के तहत हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चार्जशीट और आगे की कार्यवाही को निरस्त करने की मांग की थी।

याचिकाकर्ता की ओर से यह दलील दी गई थी कि यह मामला केवल वैवाहिक विवाद का परिणाम है, और तलाक की प्रक्रिया के बाद दबाव बनाने के लिए यह आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया गया है।

कोर्ट ने इस मामले में साफ किया कि पति द्वारा पत्नी के साथ किया गया यौन संबंध, यदि पत्नी बालिग हो, तो उसे बलात्कार के अंतर्गत नहीं लाया जा सकता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में धारा 377 का लागू होना संभव नहीं है। इसके अलावा, चिकित्सा साक्ष्य में भी बलात्कार और अप्राकृतिक कृत्य के आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी।

हालांकि, कोर्ट ने यह माना कि क्रूरता, मारपीट और अश्लीलता के आरोपों पर ट्रायल जारी रहेगा और इन पर आगे की कानूनी प्रक्रिया चलती रहेगी।

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