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23 साल पुरानी नियम विरुद्ध पदोन्नति पर हाईकोर्ट की मुहर, चार कर्मचारियों की याचिका खारिज

 

रीवा। स्कूल शिक्षा विभाग में वर्ष 2003 में लेखापालों को नियमों के विरुद्ध अन्वेषक पद पर पदोन्नत किए जाने के मामले में 17 वर्ष बाद हाईकोर्ट का फैसला आ गया है। न्यायालय ने चार कर्मचारियों की याचिका खारिज करते हुए शासन द्वारा पदोन्नति निरस्त किए जाने के आदेश को सही ठहराया है। अब संबंधित कर्मचारियों को अपने मूल पद लेखापाल पर वापस लौटना होगा।

जानकारी के अनुसार तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी ने 14 अगस्त 2003 को पांच लेखापालों को अन्वेषक पद पर पदोन्नत किया था। बाद में मामला विधानसभा तक पहुंचा और जांच में पदोन्नति नियमों के विरुद्ध पाई गई। इसके बाद आयुक्त लोक शिक्षण के निर्देश पर वर्ष 2009 में संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण रीवा ने सभी पदोन्नत कर्मचारियों को पुनः मूल पद पर पदस्थ करने के आदेश जारी किए थे।

इस आदेश के खिलाफ द्रोणाचार्य पाण्डेय, रामा प्रसन्न द्विवेदी, हरिहर प्रसाद पटेल और महमूदन खान ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 27 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि लेखापाल से अन्वेषक पद पर पदोन्नति के लिए कोई वैधानिक प्रक्रिया या नियम मौजूद नहीं था, इसलिए की गई पदोन्नति नियम विरुद्ध थी।

हालांकि न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्मचारियों से पदोन्नत पद पर कार्य करने की अवधि का वेतन एवं अन्य लाभ वापस नहीं लिए जाएंगे। बताया जाता है कि इस मामले में तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी के विरुद्ध भी विभागीय कार्रवाई की गई थी।

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