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ऊर्जाधानी में सबसे बड़े विस्थापन की तैयारी, 22 हजार मकान और 50 हजार लोग होंगे प्रभावित

 

सिंगरौली। देश की ऊर्जा राजधानी कहलाने वाला सिंगरौली अब अपने सबसे बड़े विस्थापन की ओर बढ़ रहा है। कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए एनसीएल की जयंत परियोजना के विस्तार के तहत मोरवा शहर को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है। इस प्रक्रिया से करीब 22 हजार मकान, 50 हजार लोग, 30 से अधिक स्कूल, कई मंदिर, मस्जिद, अस्पताल और अन्य सार्वजनिक संस्थान प्रभावित होंगे।

एनसीएल के अनुसार जयंत परियोजना देश की प्रमुख कोयला खदानों में शामिल है, जहां प्रतिवर्ष लगभग 30 मिलियन टन कोयले का उत्पादन होता है। खदान विस्तार के बाद अगले लगभग 25 वर्षों तक कोयला उत्पादन जारी रखने की योजना है, जिससे देश के कई ताप विद्युत संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

मोरवा शहर में रहने वाले लोगों के लिए यह सिर्फ मकानों का मामला नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी यादों और सामाजिक पहचान से जुड़ा विषय है। कई परिवारों की तीन पीढ़ियां इसी शहर में बसी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मुआवजा अपनी जगह है, लेकिन अपने पुराने घर और सामाजिक परिवेश से बिछड़ने का दर्द अलग है।

एनसीएल ने बताया कि विस्थापन की प्रक्रिया फरवरी 2024 से शुरू की गई थी। अब तक लगभग 70 मकान हटाए जा चुके हैं, जबकि 475 मकानों की कार्रवाई अंतिम चरण में है। पूरी प्रक्रिया वर्ष 2029-30 तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए भूमि स्वामियों, अन्य भूमि पर बसे परिवारों तथा आजीविका से जुड़े लोगों के लिए अलग-अलग श्रेणियां बनाकर मुआवजा प्रक्रिया संचालित की जा रही है।

विस्थापन की शुरुआत वार्ड क्रमांक 10 और 9 से हो चुकी है। इसके बाद वार्ड 8, 7, 5, 4 और 3 को भी खाली कराया जाएगा। स्थानीय लोगों की मांग है कि मुआवजे के साथ उन्हें एक सुव्यवस्थित पुनर्वास क्षेत्र भी उपलब्ध कराया जाए, जहां सभी विस्थापित परिवार एक साथ बस सकें और उनकी सामाजिक संरचना सुरक्षित रह सके। फिलहाल पुनर्वास योजना के विस्तृत स्वरूप को लेकर लोग स्पष्ट जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।

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