झारखंड में वज्रपात का कहर: 12 जून से अब तक 30 से अधिक मौतें, 35 घायल
लगातार गिर रही आकाशीय बिजली, मौसम विभाग ने जारी किया येलो अलर्ट; खुले स्थानों से दूर रहने की अपील

रांची। झारखंड में मानसून के साथ आकाशीय बिजली कहर बनकर टूट रही है। राज्य में 12 जून से अब तक वज्रपात की घटनाओं में 30 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 35 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं को देखते हुए मौसम विभाग ने अधिकांश जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है और लोगों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।
रविवार को रांची जिले के सोनाहातू क्षेत्र में वॉच टावर का निरीक्षण कर रहे वनरक्षक रोशन श्रीवास्तव की वज्रपात की चपेट में आने से मौत हो गई, जबकि दो अन्य वनकर्मी झुलस गए। वहीं लोहरदगा में तीन वर्षीय बच्ची, रांची के बेड़ो में एक किसान, सिल्ली में एक किशोर तथा गढ़वा जिले के रंका क्षेत्र में आम चुनने गए दो बच्चों की भी बिजली गिरने से जान चली गई।
24 से 26 जून के बीच चतरा, पलामू, जामताड़ा, कोडरमा, देवघर और लोहरदगा समेत कई जिलों में वज्रपात से 12 लोगों की मौत हुई और करीब 18 लोग घायल हुए। इससे पहले 21 से 23 जून के दौरान पश्चिमी सिंहभूम के टोकलो में फुटबॉल मैच के समय मैदान पर बिजली गिरने से दो खिलाड़ियों की मौत हो गई थी, जबकि खूंटी जिले के कर्रा में क्रिकेट खेल रहे युवकों पर वज्रपात होने से एक खिलाड़ी की जान चली गई और 11 अन्य घायल हो गए।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार झारखंड की भौगोलिक परिस्थितियां इसे वज्रपात के लिहाज से अत्यधिक संवेदनशील बनाती हैं। पठारी भूभाग, घने जंगल, ऊंचे वृक्ष और मानसून के दौरान गर्म व ठंडी हवाओं के टकराव से यहां आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं अधिक होती हैं। रांची, गुमला, पलामू, बोकारो और पूर्वी सिंहभूम को राज्य के प्रमुख “लाइटनिंग हॉटस्पॉट” माना जाता है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग और क्लाइमेट रेजिलिएंट ऑब्जर्विंग सिस्टम्स प्रमोशन काउंसिल (सीआरओपीसी) के आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में पिछले पांच वर्षों के दौरान हर साल औसतन 4.36 लाख से अधिक बार आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। पिछले एक दशक में वज्रपात से राज्य में कम से कम 1,669 लोगों की मौत हो चुकी है।
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग और मौसम विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि गरज-चमक के दौरान खुले मैदान, खेत, पेड़ों, बिजली के खंभों और जलाशयों के पास जाने से बचें तथा मौसम खराब होने पर तुरंत सुरक्षित स्थान पर शरण लें।













