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बच्चों के यौन शोषण की शिकायत दबाना भी अपराध, सुप्रीम कोर्ट ने दिया अहम फैसला

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी स्कूल अधिकारी को यौन शोषण की शिकायत मिलती है, तो उसे तत्काल पुलिस या संबंधित प्राधिकरण को इसकी सूचना देना अनिवार्य है। अधिकारी स्वयं जांच कर मामले को खत्म नहीं कर सकते। ऐसा करना पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत अपराध माना जाएगा।

न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि पॉक्सो अधिनियम की धारा 19 के तहत शिकायत की सूचना देना कानूनी दायित्व है। यदि कोई अधिकारी इसकी जानकारी देने में विफल रहता है, तो उसके खिलाफ धारा 21 के तहत कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें छह माह तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।

यह फैसला एक स्कूल की प्रधानाध्यापिका से जुड़े मामले में आया है, जिन पर आठ वर्षीय छात्रा के यौन शोषण की शिकायत पुलिस को न देकर स्वयं जांच करने और मामला दबाने का आरोप था। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें आरोपमुक्त करने के निचली अदालत और गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया।

अदालत ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी संस्था या अधिकारी को ऐसी शिकायत मिलने पर कानून के अनुसार तत्काल रिपोर्ट करना अनिवार्य है।

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