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यूएन में भारत का दोटूक संदेश: राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन करने वाले आर्थिक प्रतिबंध खत्म हों

संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने कहा- एकतरफा पाबंदियां विकास, मानवाधिकार और खाद्य सुरक्षा में सबसे बड़ी बाधा

नई दिल्ली/संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों और पाबंदियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ऐसे कदम देशों की राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन करते हैं और आर्थिक-सामाजिक विकास में गंभीर बाधा पैदा करते हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के काउंसलर एल्डोस मैथ्यू पुन्नूस ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत बहुपक्षवाद में विश्वास रखता है और ऐसे प्रतिबंधों का समर्थन नहीं करता जो आम नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को प्रभावित करते हैं।

उन्होंने कहा कि आर्थिक प्रतिबंधों से खाद्य सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास का अधिकार प्रभावित होता है। इसलिए भारत अन्य देशों के साथ मिलकर ऐसे प्रतिबंधों को समाप्त करने की मांग करता है, जिनका असर प्रभावित देशों की जनता पर पड़ता है। भारत ने यह भी याद दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा पहले भी सदस्य देशों से ऐसे कानून और उपाय लागू नहीं करने की अपील कर चुकी है, जिनका दूसरे देशों की संप्रभुता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हो।

भारत का यह बयान क्यूबा पर अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों पर संयुक्त राष्ट्र में हुई चर्चा के दौरान आया। भारत ने कहा कि क्यूबा ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद दुनिया के कई देशों को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराकर महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा उचित मान्यता मिलनी चाहिए।

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