स्कूलों में व्यापक यौन शिक्षा की तैयारी, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का बयान
एनसीईआरटी तैयार करेगा पाठ्यक्रम, समिति ने प्राथमिक स्तर से पढ़ाई शुरू करने की सिफारिश की

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि देशभर के स्कूलों में व्यापक यौन शिक्षा (सेक्स एजुकेशन) शुरू करने की दिशा में तैयारी की जा रही है। सरकार ने कहा कि इस संबंध में आवश्यक प्रक्रिया चल रही है और आगे की कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने यह जानकारी दी। सुनवाई के दौरान अदालत ने 16 से 18 वर्ष के किशोर-किशोरियों के आपसी सहमति वाले संबंधों से जुड़े मामलों में पॉक्सो कानून के कथित दुरुपयोग पर चिंता भी व्यक्त की।
इसी विषय के अध्ययन के लिए केंद्र सरकार ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव की अध्यक्षता में 26 सदस्यीय समिति का गठन किया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्कूलों के पाठ्यक्रम में व्यापक यौन शिक्षा, बच्चों को यौन शोषण से बचाव और सुरक्षित व्यवहार जैसे विषयों को शामिल करने की सिफारिश की है।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि एनसीईआरटी नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करे। साथ ही प्राथमिक स्तर से इन विषयों की पढ़ाई शुरू करने, प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति करने और सप्ताह में दो दिन 20-20 मिनट की कक्षाएं संचालित करने की भी अनुशंसा की गई है।
हालांकि, फिलहाल यह प्रस्ताव विचाराधीन है। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सुनवाई जारी है और अंतिम निर्णय के बाद ही इसके क्रियान्वयन को लेकर आगे की प्रक्रिया स्पष्ट होगी।













