लोकसभा अध्यक्ष के फैसले से उद्धव गुट को बड़ा झटका, छह सांसदों का शिंदे शिवसेना में विलय मान्य

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को आधिकारिक मान्यता दे दी है। इस फैसले को उद्धव ठाकरे गुट के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि अब लोकसभा में शिंदे गुट की ताकत और बढ़ गई है।
लोकसभा सचिवालय को इन छह सांसदों की ओर से विलय संबंधी आवेदन दिया गया था। अध्यक्ष ने दल-बदल कानून के प्रावधानों के तहत आवेदन पर विचार करने के बाद विलय को मान्यता प्रदान कर दी। इसके साथ ही लोकसभा में शिंदे गुट के सांसदों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है।
मान्यता प्राप्त करने वाले सांसदों में संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर-पूर्व), संजय जाधव (परभणी), संजय देशमुख (यवतमाल-वाशिम), ओमप्रकाश भूपालसिंह निम्बालकर (धाराशिव), नागेश बापुराव पाटिल अष्टीकर (हिंगोली) और भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे (शिर्डी) शामिल हैं। ये सभी पहले शिवसेना (यूबीटी) के टिकट पर लोकसभा पहुंचे थे, लेकिन बाद में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट में शामिल हो गए थे।
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब 20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे लोकसभा में शिवसेना की राजनीतिक स्थिति और शक्ति संतुलन पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। इसी बीच, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 बागी सांसदों को लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था तो दी गई है, लेकिन उनके प्रस्तावित नए दल में विलय पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।













