साइबर ठगी पर एमपी हाईकोर्ट सख्त, तीन राज्यों के डीजीपी तलब
कोर्ट की टिप्पणी- अपराधी मिनटों में खाली कर रहे खाते, पुलिस कार्रवाई अब भी धीमी

जबलपुर। साइबर ठगी के बढ़ते मामलों को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताते हुए जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि साइबर अपराधी कुछ ही मिनटों में लोगों की वर्षों की कमाई हड़प लेते हैं, जबकि पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्रवाई अपेक्षाकृत धीमी गति से चल रही है।
जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ जबलपुर निवासी एक बुजुर्ग से हुई 6.25 लाख रुपए की साइबर ठगी से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अब साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए तकनीकी विशेषज्ञता और पुलिस व्यवस्था को एक साथ लाकर प्रभावी रणनीति बनाने की जरूरत है।
केंद्रीय स्तर पर तंत्र विकसित करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, बैंकों और जांच एजेंसियों को साइबर अपराधों की जांच के लिए केंद्रीकृत व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी के कारण जांच प्रक्रिया प्रभावित होती है और पीड़ितों को समय पर राहत नहीं मिल पाती।
31 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश होंगे डीजीपी
अदालत ने पश्चिम बंगाल, झारखंड और असम के पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) को 31 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। वहीं, जबलपुर पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के लिए कहा गया है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पूर्व निर्देशों के बावजूद अधिकारियों की अनुपस्थिति पर नाराजगी भी जताई।
असम पुलिस की कार्रवाई की सराहना
कोर्ट ने साइबर ठगी के मुख्य आरोपी को महज 11 दिन में गिरफ्तार कर मध्यप्रदेश पुलिस को सौंपने के लिए असम पुलिस की सराहना की। अदालत ने कहा कि राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और त्वरित कार्रवाई से साइबर अपराधों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि डिजिटल अपराधों के दौर में पारंपरिक पुलिसिंग से काम नहीं चलेगा, बल्कि तेज, तकनीकी और समन्वित कार्रवाई ही साइबर ठगी रोकने का प्रभावी रास्ता है।













