नीट विवाद पर संसद में गतिरोध जारी, खड़गे बोले- पहले शिक्षा मंत्री का इस्तीफा फिर होगी चर्चा
सरकार चर्चा के लिए तैयार, विपक्ष जवाबदेही तय करने की मांग पर अड़ा

नई दिल्ली। नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर संसद में सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध लगातार बना हुआ है। गुरुवार को राज्यसभा में भी इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने साफ कहा कि पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होना चाहिए, इसके बाद ही नीट मामले पर चर्चा शुरू होगी।
राज्यसभा में खड़गे ने कहा कि विपक्ष चर्चा से पीछे नहीं हट रहा है, बल्कि वह शुरुआत से ही इस मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है। उन्होंने सभापति से आग्रह करते हुए कहा कि सरकार को इस मामले में स्पष्ट बयान देना चाहिए और शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
छात्रों के भविष्य से जुड़ा मामला बताया
खड़गे ने कहा कि नीट विवाद के कारण देशभर के हजारों छात्र प्रभावित हुए हैं। कई छात्र और उनके परिवार मानसिक तनाव और परेशानियों से गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को सबसे पहले छात्रों की चिंताओं और उनके भविष्य पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विपक्ष नीट मुद्दे पर विस्तृत चर्चा चाहता है, लेकिन इसके लिए शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय होना जरूरी है। जब तक शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं लिया जाता, तब तक चर्चा शुरू नहीं होगी।
सरकार बोली- चर्चा के लिए तैयार
वहीं, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि सरकार नीट पेपर लीक मामले पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने विपक्ष से समय और तारीख तय करने की अपील की है।
सरकार का कहना है कि पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और छात्रों के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी दोषियों पर कार्रवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की बात कह चुके हैं।
लगातार चौथे दिन संसद में हंगामा
नीट विवाद को लेकर संसद के दोनों सदनों में लगातार चौथे दिन कार्यवाही प्रभावित हुई। राज्यसभा में प्रश्नकाल और शून्यकाल भी हंगामे की भेंट चढ़ गए और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
विपक्ष की मांग है कि गृह मंत्री सदन में विस्तृत बयान देकर छात्रों पर हुई कार्रवाई और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उठाए गए कदमों की जानकारी दें। वहीं सरकार चर्चा के जरिए समाधान निकालने की बात कह रही है। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच जारी गतिरोध का असर संसद की कार्यवाही पर साफ दिखाई दे रहा है।













