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खुला गेट, ताले में अस्पताल… देवसर पशु चिकित्सालय की बदहाल व्यवस्था ने खोली सिस्टम की पोल

सुबह 11 बजे तक नहीं पहुंचे डॉक्टर-कर्मचारी, इलाज के इंतजार में लौटे पशुपालक; निजी व्यक्ति के भरोसे संचालित होने के आरोप

 

सिंगरौली। शासकीय पशु चिकित्सालय देवसर में अव्यवस्था और लापरवाही की तस्वीरें सामने आई हैं। गुरुवार सुबह अस्पताल पहुंचे पशुपालकों को इलाज के बजाय बंद कमरों और लटके तालों का सामना करना पड़ा। अस्पताल का मुख्य चैनल गेट खुला मिला, लेकिन कार्यालय और उपचार कक्ष बंद थे। इससे दूर-दराज के गांवों से अपने बीमार मवेशियों को लेकर आए ग्रामीणों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा।
गुरुवार, 23 जुलाई को सुबह करीब 10:59 बजे ग्रामीणों ने अस्पताल परिसर का वीडियो और फोटो बनाकर व्यवस्था की वास्तविक स्थिति उजागर की। वीडियो में स्पष्ट दिखाई देता है कि अस्पताल परिसर का बाहरी गेट खुला है, जबकि इलाज कक्ष और कार्यालय पर ताले लगे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति कोई अपवाद नहीं, बल्कि लंबे समय से रोजाना की दिनचर्या बन चुकी है।

प्राइवेट व्यक्ति के भरोसे सरकारी अस्पताल?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी नियमित रूप से समय पर ड्यूटी पर नहीं पहुंचते। उनके अनुसार, चैनल गेट की चाबी एक निजी व्यक्ति के पास रहती है, जो अपनी सुविधा के अनुसार गेट खोलता और बंद करता है। इतना ही नहीं, अस्पताल परिसर का उपयोग निजी सामान रखने के लिए भी किए जाने की बात ग्रामीणों ने कही है। यदि यह आरोप सही हैं, तो यह सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग और प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला माना जाएगा।

इलाज नहीं मिलने से बढ़ रही परेशानी
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र की बड़ी आबादी पशुपालन पर निर्भर है। बीमार पशुओं को समय पर इलाज नहीं मिलने से कई बार उनकी हालत गंभीर हो जाती है और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। आपात स्थिति में भी अस्पताल में डॉक्टर या कर्मचारी उपलब्ध नहीं रहने से लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है।

ग्रामीणों ने की कार्रवाई की मांग
पशुपालकों ने जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि अस्पताल में नियमित रूप से डॉक्टर और कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, ताकि बेजुबान पशुओं को समय पर उपचार मिल सके।
अब देखना होगा कि इस मामले के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और संबंधित विभाग क्या कदम उठाते हैं और देवसर के पशुपालकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं कब तक मिल पाती हैं।

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