भू-अर्जन और मुआवजे के बिना मकान गिराने का आरोप, रेलवे विवाद में हाईकोर्ट ने जारी किए नोटिस
देवसर के कमलेश यादव सहित अन्य की याचिका पर सुनवाई, रेलवे को जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह की मोहलत
सिंगरौली। रेलवे परियोजना से जुड़े भूमि और मकान विवाद का मामला अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर पहुंच गया है। देवसर तहसील क्षेत्र के ग्राम हरा चंदेल निवासी कमलेश यादव एवं अन्य की ओर से दायर डब्ल्यू.पी. क्रमांक 30652/2026 में आरोप लगाया गया है कि विधिवत भू-अर्जन प्रक्रिया और मुआवजा भुगतान किए बिना ही मकान को गिरा दिया गया।
मामले की सुनवाई 13 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट जबलपुर में हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शिवम शुक्ला ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पक्ष रखा। वहीं प्रतिवादी क्रमांक-5 रेलवे की ओर से अधिवक्ता गुलाब काली पटेल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित हुईं।न्यायालय ने रेलवे के अधिवक्ता को वकालतनामा दाखिल करने और जवाब प्रस्तुत करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। अन्य प्रतिवादियों के संबंध में प्रक्रिया शुल्क तीन कार्य दिवस में जमा कराने तथा आरएडी के माध्यम से नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
बिना मुआवजे मकान हटाने का आरोप
याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि रेलवे परियोजना के लिए उनकी भूमि अथवा मकान का उपयोग किए जाने से पहले कानून के तहत निर्धारित भू-अर्जन प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। उनका आरोप है कि न तो विधिवत प्रक्रिया अपनाई गई और न ही प्रभावित पक्ष को मुआवजे का भुगतान किया गया।
अब इस मामले में 10 सितंबर 2026 को अगली सुनवाई होगी। उस दौरान प्रतिवादी पक्ष का जवाब सामने आने के बाद मामले में आगे की न्यायिक कार्रवाई तय होगी। रेलवे परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण और प्रभावित परिवारों को मिलने वाले वैधानिक अधिकारों के लिहाज से यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।











