UCC विधेयक के विरोध में राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
मौलिक एवं धार्मिक अधिकारों की सुरक्षा की मांग

सिंगरौली- मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक 2026 के वर्तमान स्वरूप के विरोध में महामहिम राष्ट्रपति, भारत सरकार नई दिल्ली के नाम कलेक्टर सिंगरौली के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि समान नागरिक संहिता का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 44 में नीति-निर्देशक तत्व के रूप में है, जबकि नागरिकों के धार्मिक, सांस्कृतिक, समानता, निजता एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े अधिकार संविधान के मौलिक अधिकारों के अंतर्गत संरक्षित हैं। इसलिए किसी भी व्यक्तिगत कानून में व्यापक परिवर्तन से पहले सभी समुदायों, विधि विशेषज्ञों एवं प्रभावित पक्षों से व्यापक और सार्थक विचार-विमर्श आवश्यक है।
ज्ञापन में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, वसीयत तथा पारिवारिक कानूनों से जुड़े प्रस्तावित प्रावधानों पर आपत्ति जताते हुए कहा गया कि भारत की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखते हुए कानून में समानता के साथ-साथ संवैधानिक स्वतंत्रता और सामाजिक सद्भाव का भी संरक्षण होना चाहिए।
ज्ञापनकर्ताओं ने मांग की कि मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026 को वर्तमान स्वरूप में वापस लिया जाए अथवा इसके क्रियान्वयन पर रोक लगाई जाए, तथा सभी समुदायों और कानूनी विशेषज्ञों से व्यापक परामर्श के बाद ही कोई निर्णय लिया जाए। साथ ही जिस प्रकार जनजातीय समुदायों को उनके प्रथागत कानूनों के आधार पर संरक्षण/छूट का प्रावधान है, उसी प्रकार धार्मिक एवं समुदाय-विशिष्ट व्यक्तिगत कानूनों के संबंध में भी संवैधानिक एवं समान दृष्टिकोण अपनाया जाए।
इस अवसर पर जुल्फिकार अली, उसैद हसन सिद्दीकी एडवोकेट, मोहम्मद शाहिद खान रिंकू, अलाउद्दीन खान एडवोकेट, असलम अंसारी एडवोकेट, अनवर हुसैन अंसारी, मोहम्मद इरशाद, अब्दुल मजीद, अब्दुल्लाह, मोहम्मद रसूल, इरफान खान, जमालुद्दीन अंसारी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।












