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एमपी-यूपी सीमांत मार्ग पर वर्षों से जलभराव, 3 फीट पानी में डूबता रास्ता

पार्षद प्रेम सागर मिश्रा ने कलेक्टर को लिखा पत्र, एनटीपीसी प्रबंधन के सहयोग से स्थायी समाधान की मांग

सिंगरौली। मध्यप्रदेश के सिंगरौली और उत्तरप्रदेश के सोनभद्र जिले को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्ग पर वर्षों से बनी जलभराव की समस्या को लेकर नगर पालिक निगम सिंगरौली के वार्ड क्रमांक-36 के पार्षद प्रेम सागर मिश्रा ने जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर स्थायी समाधान की मांग की है। एनटीपीसी विंध्यनगर की बाउंड्री से सटे इस मार्ग पर बारिश के दौरान स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि आवागमन तक प्रभावित हो जाता है।
पार्षद ने पत्र में उल्लेख किया है कि ऊर्जाधानी क्षेत्र के लोगों ने देश के विकास और विद्युत परियोजनाओं की स्थापना के लिए अपनी जमीनें और घर तक छोड़े हैं, लेकिन इसके बावजूद आज भी कई क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

बारिश में बंद होने की कगार पर पहुंच जाता है मार्ग
पत्र के अनुसार एनटीपीसी विंध्यनगर की सीमा से लगे इस मार्ग पर बरसात के दिनों में कई स्थानों पर करीब तीन फीट तक पानी भर जाता है। जलभराव के कारण सड़क पर चलना मुश्किल हो जाता है और स्कूली बच्चों, कर्मचारियों, दोपहिया वाहन चालकों सहित आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लगातार पानी जमा रहने से दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है।

कलेक्टर से स्थायी समाधान की मांग
पार्षद प्रेम सागर मिश्रा ने कलेक्टर से मांग की है कि संबंधित विभागों और एनटीपीसी विंध्यनगर एवं शक्तिनगर प्रबंधन के साथ समन्वय बनाकर तत्काल जल निकासी की व्यवस्था कराई जाए। साथ ही मार्ग का तकनीकी सर्वे कराकर जलभराव के कारणों का पता लगाया जाए और स्थायी निर्माण योजना तैयार की जाए।उन्होंने सड़क के आवश्यकतानुसार ऊंचीकरण, चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण के साथ दोनों ओर वैज्ञानिक ड्रेनेज व्यवस्था विकसित करने की मांग रखी है, ताकि भविष्य में बारिश के दौरान पानी जमा न हो।

एनटीपीसी से सीएसआर के तहत सहयोग की अपील
पार्षद ने एनटीपीसी प्रबंधन से भी आग्रह किया है कि सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत इस महत्वपूर्ण मार्ग की समस्या के समाधान में सहयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि यह मार्ग दो राज्यों को जोड़ता है और प्रतिदिन हजारों लोग इसका उपयोग करते हैं।
उन्होंने स्थायी समाधान होने तक बारिश के मौसम में चेतावनी संकेतक लगाने और सुरक्षित आवागमन के लिए अस्थायी व्यवस्था करने की भी मांग की है।
अब लोगों की नजर जिला प्रशासन और एनटीपीसी प्रबंधन की कार्रवाई पर है कि वर्षों पुरानी इस समस्या का समाधान कब तक हो पाता है।

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