मेडिकल कॉलेज पहुंचने का रास्ता ही बीमार, कीचड़ में फंसा सिंगरौली का विकास
जिला मुख्यालय से महज 8 किमी दूर वार्ड-45 की सड़क बदहाल, मरीजों से लेकर स्कूली बच्चों तक की रोजाना परीक्षा

सिंगरौली। जिस रास्ते से होकर मरीज इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचते हैं, उसी रास्ते की हालत अब खुद इलाज मांग रही है। नगर निगम के वार्ड क्रमांक-45 में बारिश के बाद मुख्य मार्ग की तस्वीर सरकारी विकास के दावों की हकीकत बयां कर रही है। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे, कीचड़ और पानी का जमाव है। हालात ऐसे हैं कि राहगीरों को सड़क पर रास्ता तलाशना पड़ रहा है।यह मार्ग अमलोरी, नौगढ़, भकुआर, मुहेर और रिलायंस पुनर्वास कॉलोनी सहित कई गांवों को जिला मुख्यालय बैढ़न और मेडिकल कॉलेज से जोड़ता है। बावजूद इसके महत्वपूर्ण मार्ग की बदहाली लंबे समय से लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है।
बारिश आते ही बढ़ जाती है मुसीबत
सामान्य दिनों में किसी तरह निकलने वाला यह मार्ग बारिश होते ही दलदल में तब्दील हो जाता है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यहां से गुजरना जोखिम से कम नहीं। गड्ढों में भरा पानी उनकी गहराई छिपा देता है और जरा सी चूक दुर्घटना का कारण बन सकती है।
सबसे बड़ी चिंता उन मरीजों और उनके परिजनों की है, जिन्हें इसी मार्ग से मेडिकल कॉलेज पहुंचना पड़ता है। गंभीर मरीज को लेकर आने वाली एंबुलेंस भी खराब सड़क और जलभराव के कारण प्रभावित होती है।
विकास की तस्वीर और जमीन की हकीकत आमने-सामने
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र के विकास को लेकर समय-समय पर घोषणाएं होती रही हैं, लेकिन सड़क की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। बारिश के मौसम में समस्या और गंभीर हो जाती है।लोगों का सवाल सीधा है—जब मेडिकल कॉलेज जैसे महत्वपूर्ण संस्थान तक पहुंचने वाला मार्ग ही सुरक्षित नहीं है, तो आम ग्रामीणों के लिए बेहतर सड़क व्यवस्था की उम्मीद कैसे की जाए?
डीएमएफ से सड़क सुधार की मांग
सिंगरौली जैसे खनिज संपदा वाले जिले में डीएमएफ फंड के जरिए विभिन्न विकास कार्य कराए जाते हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों की मांग है कि जनहित से सीधे जुड़े इस मार्ग की स्थिति का जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण कराया जाए और सड़क के स्थायी सुधार के लिए ठोस कार्ययोजना बनाई जाए।
सिर्फ मरम्मत नहीं, स्थायी समाधान चाहिए
लोगों का कहना है कि गड्ढों में मिट्टी या गिट्टी डालकर कुछ दिनों के लिए रास्ता चलने लायक बना देना पर्याप्त नहीं होगा। जल निकासी की समुचित व्यवस्था के साथ सड़क का गुणवत्तापूर्ण निर्माण जरूरी है, ताकि हर साल बारिश में यही समस्या दोबारा खड़ी न हो।
अब देखना यह है कि मेडिकल कॉलेज के इस बदहाल रास्ते पर प्रशासन की नजर कब पड़ती है और कीचड़ से जूझ रहे हजारों लोगों को कब राहत मिलती है।











