बिहार में न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष करने की तैयारी
पटना हाईकोर्ट की फुल कोर्ट ने लिया फैसला, अब राज्य सरकार की मंजूरी और प्रक्रिया पर नजर

पटना। बिहार की जिला न्यायपालिका में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। पटना हाईकोर्ट की फुल कोर्ट ने 18 अगस्त 2026 को इस संबंध में निर्णय लिया है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रूपेश देव ने 31 अगस्त को बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया है।
हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद अब इसे लागू करने के लिए राज्य सरकार की ओर से आवश्यक प्रशासनिक और विधिक प्रक्रिया पूरी की जानी है। इससे उन न्यायिक अधिकारियों को राहत मिल सकती है, जिनकी सेवानिवृत्ति 60 वर्ष की आयु में प्रस्तावित थी।
सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है मामला
न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में ऑल इंडिया जजेज एसोसिएशन बनाम भारत संघ मामले के तहत विचाराधीन है। 22 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने-अपने हाईकोर्ट से परामर्श कर जिला न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 61 वर्ष करने पर निर्णय लेने की अनुमति दी थी।
सर्वोच्च अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि पूरे देश में जिला न्यायपालिका के अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष करने का व्यापक मुद्दा अलग से तय किया जाएगा।
कई राज्यों में अलग-अलग स्थिति
सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश और तेलंगाना में सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष करने संबंधी फैसलों की जानकारी भी सामने आई थी। वहीं कुछ राज्यों ने आयु बढ़ाने पर असहमति जताई थी।
पटना हाईकोर्ट का निर्णय न्यायिक प्रशासन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समर्थकों का तर्क है कि अनुभवी न्यायिक अधिकारियों की सेवाएं दो वर्ष और मिलने से न्यायिक कार्य में निरंतरता और अनुभव का लाभ मिलेगा। हालांकि इससे पदोन्नति और नई नियुक्तियों की प्रक्रिया पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी संतुलन जरूरी होगा।
अब बिहार सरकार की अगली कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट के व्यापक फैसले पर इस व्यवस्था का अंतिम स्वरूप निर्भर करेगा।













