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लागत लाभ से आरएंडडी में भारत हासिल कर सकता है 12 लाख करोड़ के अवसर : पीयूष गोयल

केंद्रीय मंत्री बोले- उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी से भारत बन सकता है वैश्विक शोध एवं नवाचार का केंद्र

नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत अपने लागत लाभ का फायदा उठाकर शोध एवं विकास (आरएंडडी) के क्षेत्र में करीब 12 लाख करोड़ रुपए के अवसर हासिल कर सकता है। इसके लिए सरकारी सहयोग को उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों की क्षमता से जोड़ना जरूरी है।

गोयल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किए वीडियो में कहा कि भारत में शोध की लागत स्विट्जरलैंड और यूरोप की तुलना में करीब पांचवें या छठे हिस्से तक हो सकती है। यह लागत लाभ भारत को वैश्विक शोध एवं नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने का बड़ा अवसर देता है।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार करीब एक लाख करोड़ रुपए के निवेश से आरएंडडी कार्यक्रम शुरू करे और उद्योग जगत भी बराबर का योगदान दे, तो मेडिकल कॉलेजों, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों और अन्य उत्कृष्टता केंद्रों की क्षमताओं का उपयोग कर 10 से 12 लाख करोड़ रुपए तक का शोध कार्य किया जा सकता है।

गोयल ने उत्पाद डिजाइन, चिकित्सकीय परीक्षण और चिकित्सा उपकरणों के निर्माण जैसे क्षेत्रों में मौजूद संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत को जेनेरिक दवाओं में मिली सफलता से आगे बढ़ते हुए नई दवाओं, जैव-समान दवाओं और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शोध एवं नवाचार पर अधिक जोर देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत को अपने उत्पाद विकसित करने और उनके पेटेंट कराने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। साथ ही सक्रिय औषधीय घटकों और प्रमुख कच्चे माल के घरेलू उत्पादन को मजबूत करने की जरूरत है।

गोयल ने बताया कि सरकार थोक औषधि पार्क और 100 नए औद्योगिक पार्क विकसित कर रही है। इन पार्कों में औषधि और स्वास्थ्य क्षेत्र की कंपनियों के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

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