गुजरात में नया किराया कानून मंजूर, किरायेदारों को बड़ी राहत; तीन महीने से ज्यादा सिक्योरिटी डिपॉजिट नहीं
लिखित किराया समझौता अनिवार्य, मकान मालिक को 24 घंटे पहले देनी होगी सूचना; विवादों के लिए किराया प्राधिकरण, न्यायालय और अधिकरण की व्यवस्था

अहमदाबाद। गुजरात विधानसभा ने शुक्रवार को गुजरात किराया विधेयक-2026 को सर्वसम्मति से पारित कर दिया। नए कानून का उद्देश्य मकान मालिक और किरायेदार के अधिकारों को स्पष्ट करने के साथ किराये की व्यवस्था में पारदर्शिता लाना और विवादों के जल्द निपटारे के लिए अलग न्यायिक व्यवस्था तैयार करना है। सबसे अहम प्रावधान के तहत मकान मालिक अब तीन महीने के किराये से अधिक सिक्योरिटी डिपॉजिट नहीं ले सकेगा।
लिखित समझौता और डिजिटल रिकॉर्ड जरूरी
नए कानून के तहत किराये पर दी जाने वाली संपत्ति के लिए लिखित किराया समझौता अनिवार्य होगा। समझौते के दो महीने के भीतर मकान मालिक और किरायेदार को इसकी संयुक्त जानकारी किराया प्राधिकरण को देनी होगी। इसके लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया जाएगा और प्रत्येक समझौते को विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी।
एक महीने में लौटानी होगी सुरक्षा राशि
मकान खाली करने और कब्जा वापस मिलने के बाद मकान मालिक को सिक्योरिटी डिपॉजिट एक महीने के भीतर लौटाना होगा। हालांकि, कानून के तहत वैध कटौती की अनुमति होगी। समझौते की अवधि समाप्त होने के बाद बिना नवीनीकरण के मकान में रहने पर किरायेदार को सामान्य किराये का दोगुना भुगतान करना होगा।
मकान में प्रवेश से पहले 24 घंटे की सूचना
मकान मालिक सामान्य परिस्थितियों में किराये के परिसर में प्रवेश करने से कम से कम 24 घंटे पहले किरायेदार को सूचना देगा। प्रवेश सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच ही किया जा सकेगा। आपात स्थिति में यह नियम लागू नहीं होगा। पानी, बिजली और पाइप से मिलने वाली खाना पकाने की गैस जैसी आवश्यक सेवाएं बंद करना भी प्रतिबंधित होगा।
मनमानी बेदखली पर रोक
समझौते की निर्धारित अवधि के दौरान किरायेदार को मनमाने तरीके से बाहर नहीं किया जा सकेगा। बेदखली के लिए किराया न्यायालय की प्रक्रिया अपनानी होगी। दो महीने तक किराया नहीं देना, संपत्ति को नुकसान पहुंचाना या बिना अनुमति किसी अन्य व्यक्ति को परिसर किराये पर देना जैसे मामलों में बेदखली की कार्रवाई की जा सकेगी।
तीन स्तर पर होगा विवादों का निपटारा
किराये से जुड़े मामलों के लिए किराया प्राधिकरण, किराया न्यायालय और किराया अधिकरण की तीन स्तरीय व्यवस्था बनाई जाएगी। अपील की सुनवाई किराया अधिकरण में होगी, जिसकी अध्यक्षता जिला न्यायाधीश या अतिरिक्त जिला न्यायाधीश स्तर के अधिकारी करेंगे।
कई संपत्तियां दायरे से बाहर
सरकारी भवन, कंपनियों के कर्मचारियों के आवास, धार्मिक एवं धर्मार्थ संस्थानों की संपत्तियां, वक्फ और सार्वजनिक न्यास की संपत्तियों को कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। हालांकि, दोनों पक्षों की सहमति होने पर इन्हें कानून के दायरे में लाया जा सकता है। नए कानून के लागू होने के बाद 1947 के पुराने किराया कानून की जगह नई व्यवस्था लागू होगी।













