ऐश डाइक फूटने के विरोध में 100 घंटे से जल सत्याग्रह, चिता पर लेटीं महिलाएं
11 सूत्रीय मांगों पर अड़े जिला पंचायत सदस्य और विस्थापित, लिखित समझौते के बिना आंदोलन खत्म नहीं करने की चेतावनी

सिंगरौली। रिलायंस सासन पावर प्लांट की ऐश डाइक से राखड़ और दूषित पानी फैलने से प्रभावित ग्रामीणों का आंदोलन लगातार जारी है। जिला पंचायत सदस्य संदीप शाह के नेतृत्व में विस्थापित और किसान पिछले 100 घंटे से हर्रहवा नदी के गहरे पानी में उतरकर जल सत्याग्रह कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि राख मिश्रित पानी और मलबे से हजारों एकड़ फसल बर्बाद हो गई है तथा कई घरों को नुकसान पहुंचा है।

जलस्तर बढ़ने के बावजूद आंदोलनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। महिलाओं ने नदी के बीच चिता सजाकर उस पर लेटकर विरोध जताया। उनका कहना है कि खेती, घर और आजीविका प्रभावित होने के बाद उनके सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
आंदोलनकारियों ने करीब तीन वर्ष पहले ऐश डाइक टूटने से हुई सात लोगों की मौत का भी हवाला देते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
11 सूत्रीय मांगों पर अड़े आंदोलनकारी
रिलायंस विस्थापित संघ ने ऐश डाइक में मलबा और पानी डालने पर तत्काल रोक, प्रभावित परिवारों का पुनर्वास, ऐश डाइक के आसपास एक किलोमीटर क्षेत्र का भू-अर्जन, पात्र विस्थापित परिवारों के सदस्यों को स्थायी रोजगार या जीवन निर्वाह भत्ता, फसल का नियमित मुआवजा, स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
इसके अलावा ऐश डाइक के चारों ओर पक्की सड़क, विस्थापित पेंशनधारियों का भत्ता बढ़ाकर छह हजार रुपये प्रतिमाह करने, डीएवी स्कूल में विस्थापित बच्चों को प्राथमिकता, आवंटित भूखंडों का वास्तविक कब्जा और भू-पुस्तिका, कंपनी व आउटसोर्स कर्मचारियों की सूची सार्वजनिक करने तथा सीएसआर राशि का प्रभावित गांवों के विकास और प्रदूषण नियंत्रण में उपयोग करने की मांग शामिल है।
जिला पंचायत सदस्य संदीप शाह ने कहा कि जब तक जिला प्रशासन और कंपनी प्रबंधन 11 सूत्रीय मांगों पर ठोस लिखित समझौता नहीं करते, तब तक हर्रहवा नदी में जल सत्याग्रह जारी रहेगा।













