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30 सितंबर को एनसीएल मुख्यालय घेरेंगे विस्थापित, पुनर्वास की मांग पर पहली बार एकजुट हुए सभी मंच

मोरवा में आम सभा में बनी आंदोलन की रणनीति; मुआवजा, आर एंड आर, पुनर्वास, विस्थापन कार्ड और गणना पत्रक समेत 19 मांगों को लेकर आंदोलन

सिंगरौली- एनसीएल के लिए मोरवा क्षेत्र में चल रही भूमि अधिग्रहण एवं विस्थापन प्रक्रिया के बीच प्रभावित परिवारों की मांगों को लेकर विभिन्न विस्थापन मंच अब एक साथ आ गए हैं। मुआवजा, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (आर एंड आर) की कथित विसंगतियों और दस्तावेजी प्रक्रिया में आ रही परेशानियों को लेकर रविवार को मोरवा में आयोजित आम सभा में अलग-अलग मंचों से जुड़े पदाधिकारी एवं विस्थापित एक मंच पर दिखाई दिए। आम सभा में 30 सितंबर को एनसीएल मुख्यालय का घेराव, धरना एवं प्रदर्शन करने की रणनीति तय की गई। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि लंबे समय से अलग-अलग स्तर पर विस्थापितों की समस्याएं उठाई जाती रही हैं, लेकिन अब इन मांगों को लेकर सभी विस्थापन मंचों के एकजुट होकर सामूहिक आंदोलन करने का निर्णय लिया गया है। आंदोलन में पुनर्वास को सबसे प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। विस्थापितों का कहना है कि केवल जमीन का मुआवजा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावित परिवारों को उचित पुनर्वास, पुनर्स्थापन, आवास, रोजगार और अन्य आर एंड आर लाभ भी सुनिश्चित किए जाने चाहिए।
मोरवा की आम सभा में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि अलग-अलग मांगों और क्षेत्रों को लेकर सक्रिय विस्थापन मंचों ने सामूहिक रूप से आंदोलन की दिशा तय की। वक्ताओं ने कहा कि विस्थापितों के मुद्दे अलग-अलग नहीं हैं, बल्कि भूमि अधिग्रहण से प्रभावित सभी परिवारों के अधिकारों से जुड़े हैं। इसलिए अब मांगों को अलग-अलग उठाने के बजाय संयुक्त रूप से एनसीएल प्रबंधन के समक्ष रखा जाएगा।

पुनर्वास को बनाया आंदोलन का प्रमुख मुद्दा

विस्थापितों ने कहा कि भूमि अधिग्रहण के साथ प्रभावित परिवारों के लिए पुनर्वास की व्यवस्था स्पष्ट होनी चाहिए। पुनर्वास के लिए भूमि आवंटन, आवास, रोजगार और आर एंड आर लाभों को लेकर स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की गई है। मंच का कहना है कि विस्थापन की प्रक्रिया तभी पूरी मानी जा सकती है, जब प्रभावित परिवारों के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की व्यवस्था सुनिश्चित हो नोटिस के साथ गणना

पत्रक और विस्थापन कार्ड की मांग

आम सभा में मांग उठाई गई कि एनसीएल द्वारा प्रभावित परिवारों को दिए जाने वाले अधिग्रहण नोटिस के साथ भूमि, मकान एवं परिसंपत्तियों के मूल्यांकन का विस्तृत कंसोलिडेटेड कैलकुलेशन शीट उपलब्ध कराया जाए। इससे विस्थापित अपने मुआवजे की गणना को समझ सकेंगे और किसी त्रुटि की स्थिति में समय रहते आपत्ति दर्ज करा सकेंगे।

इसके साथ ही पात्र परिवारों को विस्थापन कार्ड जारी करने की मांग की गई। विस्थापितों का कहना है कि रोजगार सहित विभिन्न पुनर्वास लाभों में विस्थापन की स्थिति प्रमाणित करने के लिए यह महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
विस्थापितों ने सीएफसी में दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि दस्तावेजों को लेकर प्रभावित परिवारों को अलग-अलग तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मंच ने स्पष्ट एवं सरल दस्तावेज सूची जारी करने तथा अनावश्यक कागजात की मांग नहीं किए जाने की मांग की।

मुआवजा निर्धारण और 12 प्रतिशत मूल्य वृद्धि का मुद्दा

मंच की ओर से मुआवजा निर्धारण में पारदर्शिता की मांग की गई है। पत्र में भूमि एवं परिसंपत्तियों के मूल्यांकन को लेकर भी कई बिंदु उठाए गए हैं। परिसंपत्तियों के मूल्यांकन में RFCTLARR Act, 2013 के प्रावधानों के अनुरूप 12 प्रतिशत वार्षिक मूल्य वृद्धि जोड़ने की मांग रखी गई है।
वहीं मुआवजा निर्धारित होने के बावजूद भुगतान में देरी होने की स्थिति में विलंबित भुगतान पर ब्याज दिए जाने की मांग भी की गई है।
विस्थापित मंच ने परिवार के पात्र सभी बालिग सदस्यों को विस्थापन लाभ देने की मांग की है। इसके अलावा दूसरी की भूमि पर एग्रीमेंट के माध्यम से बनाए गए मकानों के भवन निर्माताओं को भी विस्थापन लाभ देने तथा लंबे समय से मोरवा में रह रहे किरायेदारों एवं व्यवसाय करने वाले प्रभावित लोगों को भी नियमानुसार पुनर्वास प्रक्रिया में शामिल करने की मांग रखी गई।

30 सितंबर को होगा बड़ा आंदोलन

आम सभा में निर्णय लिया गया कि मांगों के समाधान के लिए 30 सितंबर को एनसीएल मुख्यालय का घेराव किया जाएगा। इसमें विभिन्न विस्थापन मंचों के साथ बड़ी संख्या में प्रभावित परिवारों के शामिल होने की बात कही गई है। आंदोलन के दौरान पुनर्वास, मुआवजा, आर एंड आर, रोजगार, विस्थापन कार्ड, गणना पत्रक और दस्तावेजी प्रक्रिया से जुड़ी मांगों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
बैठक में नरेंद्र चंद्र सिंह, दधिलाल सिंह, अभय तिवारी, मनोज कुलश्रेष्ठ, चच्चू सिंह, राजेश सिंह, शेखर सिंह, चंद्र प्रकाश सिंह, आरबी सिंह, अरविंद तिवारी, पार्षद प्रतिनिधि चंद्रिका वर्मा, पार्षद प्रतिनिधि सिल्लू गुप्ता, एल्डरमैन कालिका गुप्ता, राजेश गुप्ता सहित बड़ी संख्या में विस्थापित एवं स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।

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