यूपीएससी प्रीलिम्स के 27 सवालों पर उठे सवाल, जवाबों की जांच तक पहुंचा विवाद

नई दिल्ली। संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 में 27 प्रश्नों को लेकर अभ्यर्थियों की आपत्तियां सामने आई हैं। अभ्यर्थियों का दावा है कि कुछ सवालों की उत्तर-कुंजी में दिए गए जवाब सही नहीं हैं, जबकि कुछ प्रश्नों में एक से अधिक विकल्प संभावित हैं। कुछ अभ्यर्थियों ने प्रश्नों की भाषा को भी अस्पष्ट बताते हुए आपत्ति जताई है। मामला अब केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण यानी कैट तक पहुंच गया है।
सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 24 मई 2026 को आयोजित की गई थी। यूपीएससी की वेबसाइट पर परीक्षा का प्रश्नपत्र उपलब्ध है। विवादित प्रश्नों को लेकर अभ्यर्थियों का कहना है कि मामला केवल उत्तर-कुंजी में सही विकल्प चुनने तक सीमित नहीं है, बल्कि कुछ प्रश्नों की संरचना और उनकी व्याख्या भी सवालों के घेरे में है।
ग्रैंड स्लैम वाले सवाल पर भी विवाद
विवादित प्रश्नों में खेल से संबंधित ग्रैंड स्लैम का प्रश्न भी शामिल है। इसमें चारों ग्रैंड स्लैम प्रतियोगिताओं की साझा व्यवस्था, खिलाड़ियों की प्रवेश पात्रता और वाइल्ड कार्ड की संख्या से जुड़े कथन दिए गए थे। अभ्यर्थियों और विभिन्न परीक्षा विश्लेषणों में इस प्रश्न के कथनों की व्याख्या को लेकर अलग-अलग तर्क सामने आए हैं।
जीरो एफआईआर के सवाल ने बढ़ाई कानूनी उलझन
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत जीरो एफआईआर से जुड़ा प्रश्न भी विवादित बताया जा रहा है। इसमें तीन कथन दिए गए थे। अभ्यर्थियों की आपत्ति कथनों में संज्ञेय और असंज्ञेय अपराधों के उल्लेख तथा इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सूचना देने को लेकर है। उनका तर्क है कि इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सूचना देने की सुविधा और उसकी अनिवार्यता अलग-अलग विषय हैं।
ऋग्वैदिक कृषि के प्रश्न पर अलग-अलग व्याख्या
ऋग्वैदिक काल में कृषि और कुओं से सिंचाई से संबंधित प्रश्न पर भी मतभेद सामने आया है। इसमें कुओं से पानी निकालने की व्यवस्था, कृषि उपकरण और बैलों के उपयोग से जुड़े कथन शामिल थे। उपलब्ध उत्तर-विश्लेषणों में ‘1 और 3’ को उत्तर बताया गया है, लेकिन विभिन्न विशेषज्ञों और कोचिंग संस्थानों की व्याख्याओं में अंतर बताया गया है।
एक-एक अंक हो सकता है अहम
प्रारंभिक परीक्षा में कटऑफ के आसपास रहने वाले अभ्यर्थियों के लिए कुछ अंकों का अंतर अगले चरण की पात्रता को प्रभावित कर सकता है। इसी वजह से उत्तर-कुंजी में कथित त्रुटि या प्रश्न की अस्पष्टता को लेकर उठाई गई आपत्तियां महज अकादमिक बहस नहीं रह जातीं।
सितंबर 2026 में सामने आए एक अन्य मामले में 63 अभ्यर्थियों ने सामान्य अध्ययन पेपर-1 के 15 और सीएसएटी पेपर-2 के 12 प्रश्नों पर आपत्ति जताई थी। इस मामले में कैट ने यूपीएससी और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था तथा अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को निर्धारित बताई गई है।
फिलहाल विवादित 27 प्रश्नों में वास्तव में कितनी त्रुटियां हैं, इस पर कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इसलिए सभी प्रश्नों को गलत मानना जल्दबाजी होगी। फिलहाल मामला अभ्यर्थियों की आपत्तियों, उत्तर-कुंजी और उनके समर्थन में पेश किए जा रहे दस्तावेजों व तर्कों की जांच का है।













