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चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल, सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार

नई दिल्ली। चुनाव आयोग के कामकाज और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर एक नई याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई करने पर सहमति जताई है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि क्या बहुसदस्यीय चुनाव आयोग के निर्णय मुख्य चुनाव आयुक्त अकेले ले सकते हैं।

वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह की ओर से मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया। याचिका में दलील दी गई है कि चुनाव आयोग एक बहुसदस्यीय संवैधानिक निकाय है और उसके निर्णय सर्वसम्मति या कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बहुमत से लिए जाने चाहिए।

याचिका में संविधान के अनुच्छेद 324 का हवाला देते हुए कहा गया है कि चुनावों और मतदाता सूचियों से संबंधित अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति किसी एक पदाधिकारी में नहीं, बल्कि चुनाव आयोग में निहित है। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह स्पष्ट करने का अनुरोध किया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने किस अधिकार के तहत आयोग की सामूहिक निर्णय लेने की शक्ति का व्यक्तिगत रूप से इस्तेमाल किया।

याचिका में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से एसआईआर से जुड़े कुछ निर्णयों पर कथित आपत्तियों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें दावा किया गया है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच करीब 14 मामलों में दोनों आयुक्तों ने आपत्तियां दर्ज की थीं। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के बाद कहा है कि व्यक्तिगत स्तर पर व्यक्त विचारों को आयोग के अंतिम निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए और एसआईआर से जुड़े निर्णय सामूहिक रूप से लिए गए हैं।

याचिका में फॉर्म-6 और मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रिया को लेकर भी कानूनी सवाल उठाए गए हैं। इसमें दावा किया गया है कि फॉर्म-6 में एसआईआर से संबंधित अतिरिक्त प्रावधान लागू करने के लिए संबंधित नियमों में संशोधन की आवश्यकता थी और इस संबंध में प्रक्रिया तथा अधिकार क्षेत्र की न्यायिक जांच की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता ने एसआईआर से जुड़े निर्णयों और उसके आधार पर की गई कार्रवाइयों की वैधता पर भी सवाल उठाया है। अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह देखा जाएगा कि याचिका में उठाए गए संवैधानिक और वैधानिक सवालों पर अदालत किस तरह विचार करती है।

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