बड़ी खबरब्रेकिंग न्यूज़मध्य प्रदेश

उज्जैन शाही मस्जिद मामले में हाईकोर्ट का आदेश, समझौते के आधार पर अपील का निपटारा

 

इंदौर। उज्जैन की शाही मस्जिद वक्फ पांच मोचियान से जुड़े विध्वंस नोटिस के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने समझौते के आधार पर अपील का निपटारा कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि नगर निगम ने अपने जवाब और विवादित नोटिस में जो आश्वासन दिए हैं, वे निगम के लिए बाध्यकारी रहेंगे।

मामला सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण की योजना से जुड़ा है। नगर निगम ने सड़क को 15 मीटर चौड़ा करने की परियोजना के तहत शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने का नोटिस जारी किया था। इस नोटिस को चुनौती देते हुए दो अलग-अलग समूहों की ओर से हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थीं, जिन्हें एकल पीठ ने खारिज कर दिया था। इसके बाद डिवीजन बेंच में अपील की गई।

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि शाही मस्जिद की अधिकृत प्रशासनिक समिति और नगर निगम के बीच विवाद को लेकर समझौता हो चुका है। अपीलकर्ता की ओर से हालांकि निगम के आश्वासनों के भविष्य में पालन को लेकर आशंका जताई गई और अनुरोध किया गया कि समझौते से संबंधित स्थिति को अदालत के आदेश में दर्ज किया जाए।

जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ ने कहा कि नगर निगम द्वारा अपने जवाब और विवादित नोटिस में दिए गए आश्वासन उसके लिए बाध्यकारी होंगे। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि समझौते की विस्तृत शर्तें उसके समक्ष उपलब्ध नहीं थीं। ऐसे में अपील का निपटारा समझौते और निगम की ओर से रिकॉर्ड पर दिए गए आश्वासनों के आधार पर किया गया।

सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से अपील की सुनवाई योग्य होने पर भी आपत्ति उठाई गई। निगम ने दावा किया कि सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत अब तक 80 से अधिक ढांचे हटाए जा चुके हैं, जिनमें अधिकांश मंदिर बताए गए। निगम के अनुसार शाही मस्जिद के कुल क्षेत्रफल के 10 प्रतिशत से भी कम हिस्से को हटाने का प्रस्ताव है। अदालत ने इन दावों को निगम के पक्ष के रूप में दर्ज किया।

मामले में प्रतिवादियों की ओर से अदालत को दो वीडियो भी दिखाए गए, जिनके बारे में बताया गया कि उनमें समझौते के तहत संबंधित हिस्से को हटाने की कार्रवाई दिखाई गई है। हाईकोर्ट ने समझौते को ध्यान में रखते हुए अपील का निपटारा कर दिया।

अदालत के आदेश का मुख्य प्रभाव यह है कि अपील समाप्त होने के बावजूद नगर निगम अपने रिकॉर्ड पर दिए गए आश्वासनों से पीछे नहीं हट सकेगा। हाईकोर्ट ने मस्जिद के स्वामित्व या धार्मिक स्वरूप से जुड़े किसी व्यापक विवाद पर कोई नया निष्कर्ष दर्ज नहीं किया है। अब समझौते के तहत आगे की कार्रवाई और निगम द्वारा दिए गए आश्वासनों के पालन पर नजर रहेगी।

Author

Related Articles

Back to top button