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बागेश्वर धाम दुष्कर्म मामले में आरोपी का डीएनए भ्रूण से नहीं मिला, फिर भी जमानत खारिज

हाईकोर्ट ने छतरपुर एसपी को एसआईटी गठित कर यौन उत्पीड़न करने वाले और भ्रूण के जैविक पिता का पता लगाने के दिए निर्देश

जबलपुर। बागेश्वर धाम पहुंची 16 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप से जुड़े मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आरोपी राजू जाटव की दूसरी जमानत याचिका खारिज कर दी है। सुनवाई के दौरान सामने आया कि आरोपी का डीएनए गर्भपात के बाद सुरक्षित रखे गए भ्रूण से मैच नहीं हुआ। वहीं अदालत में नाबालिग अपने पहले दिए गए आरोपों से भी मुकर गई। इसके बावजूद हाईकोर्ट ने माना कि नाबालिग के साथ शारीरिक संबंध बने थे और वह गर्भवती हुई थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने छतरपुर पुलिस अधीक्षक को विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने के निर्देश दिए हैं। एसआईटी अब यह पता लगाएगी कि नाबालिग का यौन उत्पीड़न किस व्यक्ति ने किया और भ्रूण का जैविक पिता कौन है।

जानकारी के अनुसार, परिवार से नाराज होकर नाबालिग 16 मार्च को बागेश्वर धाम पहुंची थी। अगले दिन उसकी मुलाकात राजगढ़ निवासी राजू जाटव से हुई। आरोप है कि राजू उसे घर छोड़ने के बहाने पास के खेत में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद वह उसे करीब 15 दिन तक अपने साथ रखकर पचोर स्थित अपने घर ले गया। राजू की पत्नी को मामले की जानकारी मिलने पर वह नाबालिग को लेकर पुलिस के पास पहुंची।

पुलिस और बाल कल्याण समिति के समक्ष नाबालिग ने घटना की जानकारी दी। चिकित्सकीय जांच में उसके गर्भवती होने की पुष्टि हुई। बाद में गर्भपात कराया गया और भ्रूण को सुरक्षित रखा गया। आरोपी का रक्त नमूना लेकर डीएनए जांच कराई गई।

सागर स्थित राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की 29 अगस्त 2026 की रिपोर्ट में सामने आया कि राजू जाटव भ्रूण का जैविक पिता नहीं है। इसके बाद भी अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया।

अदालत में शुरुआती बयानों से अलग बात कही

सुनवाई के दौरान नाबालिग ने अभियोजन के आरोपों का समर्थन नहीं किया। जिरह में उसने कहा कि राजू ने उसके साथ दुष्कर्म नहीं किया था। हालांकि, अदालत ने उसके शुरुआती बयानों को भी रिकॉर्ड पर लिया, जिनमें उसने पुलिस के समक्ष आरोपी पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था।

राजू जाटव की दूसरी जमानत याचिका पर 25 सितंबर को न्यायमूर्ति अजय निरंकारी की अदालत में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी का डीएनए भ्रूण से मेल नहीं खाने के बावजूद यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि नाबालिग गर्भवती हुई थी। अब एसआईटी जांच के जरिए घटना की वास्तविकता और भ्रूण के जैविक पिता की पहचान सामने लाने की कोशिश की जाएगी।

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