ऋग्वेद ने भारतीय ज्ञान-विरासत को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई: चांसलर पद्मश्री प्रो. हरमहेन्द्र सिंह बेदी

मनोज शर्मा,चंडीगढ़। अखिल भारतीय साहित्य परिषद् पंचकूला इकाई, संवाद साहित्य मंच चंडीगढ़ एवं श्रीमती सिकंदरा देवी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विनोद शर्मा विरचित काव्य-संग्रह ‘ऋग्वेदामृत’ का विमोचन चंडीगढ़ प्रेस क्लब, सेक्टर-27 में साहित्यकारों, शिक्षाविदों एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. हरमहेन्द्र सिंह बेदी, कुलाधिपति, केंद्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला ने कहा कि वेद भारतीय ज्ञान-परंपरा के मूल स्रोत हैं। उन्होंने अपने संबोधन में मैक्स मूलर के ऋग्वेद के अध्ययन और प्रकाशन संबंधी योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि ऋग्वेद के संरक्षण और अध्ययन की परंपरा ने भारतीय ज्ञान-विरासत को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पद्मश्री बेदी ने ऋग्वेद के पंजाब से जुड़े ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संदर्भों को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि ऋग्वेद की ज्ञान-परंपरा पंजाब की सांस्कृतिक चेतना से भी गहराई से जुड़ी रही है। ‘ऋग्वेदामृत’ के माध्यम से वैदिक चिंतन को आधुनिक काव्य-संवेदना से जोड़ने का सार्थक प्रयास किया गया है। डॉ. गुरनाम कौर बेदी (डी.लिट.), पूर्व प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय, अमृतसर ने कहा कि साहित्य समाज को दिशा देने का माध्यम है। ‘ऋग्वेदामृत’ भारतीय सांस्कृतिक जड़ों, नैतिक मूल्यों और आत्मचिंतन से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कृति है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार एवं संवाद साहित्य मंच चंडीगढ़ के अध्यक्ष श्री प्रेम विज ने कहा कि डॉ. विनोद शर्मा का साहित्य भारतीय ज्ञान-परंपरा और मानवीय सरोकारों से निरंतर जुड़ा रहा है। ‘ऋग्वेदामृत’ वैदिक विचारों की सहज एवं प्रभावशाली काव्यात्मक अभिव्यक्ति है।
श्री के.के. शारदा, अध्यक्ष, आचार्यकुल चंडीगढ़ एवं खादी सेवा संघ पंजाब ने कहा कि वेदों का संदेश सत्य, ज्ञान, श्रेष्ठ कर्म और मानव कल्याण का संदेश है। इस ज्ञान को काव्य के माध्यम से जनसामान्य तक पहुंचाना सराहनीय प्रयास है।
डॉ. संतोष गर्ग, उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय साहित्य परिषद् हरियाणा प्रांत ने कहा कि आज की पीढ़ी को भारतीय ज्ञान-परंपरा और जीवन-मूल्यों से जोड़ने की आवश्यकता है। ‘ऋग्वेदामृत’ इस दिशा में महत्वपूर्ण साहित्यिक पहल है। अखिल भारतीय साहित्य परिषद पंचकूला इकाई से अनिल चिंतक ने शुभकामनाएं दी हैं। राज विज, सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि साहित्य मनुष्य में संवेदनशीलता, सकारात्मक सोच और नैतिक चेतना विकसित करता है। अमूल्या ने कहा कि विद्यार्थियों और युवाओं को भारतीय संस्कृति एवं वैदिक ज्ञान से जोड़ने में साहित्य महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। काव्य-संग्रह के रचनाकार डॉ. विनोद शर्मा ने कहा कि ‘ऋग्वेदामृत’ के माध्यम से वैदिक ज्ञान, जीवन-दर्शन और मानवीय मूल्यों को सरल एवं काव्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि साहित्य का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मनुष्य में विवेक, संवेदना और नैतिक चेतना का विकास करना भी है।












