वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में छोड़े गए दो चीते, मध्य प्रदेश में बना तीसरा चीता आवास
कूनो से लाए गए चीतों को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया विमुक्त, गिद्ध संख्या आकलन-2026 रिपोर्ट और बुंदेली पुस्तक का विमोचन

सागर। मध्य प्रदेश में चीता संरक्षण की दिशा में बुधवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सागर जिले के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में कूनो राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए दो चीतों को खुले वन क्षेत्र में विमुक्त किया। इसके साथ ही वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश में चीतों का तीसरा आवास बन गया है। इससे पहले कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधीसागर अभयारण्य में चीतों को बसाया जा चुका है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने गिद्ध संख्या आकलन-2026 रिपोर्ट का विमोचन भी किया। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में गिद्धों की संख्या में 123 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री ने इसे वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
कार्यक्रम में बुंदेली बोली में तैयार ‘वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व’ पुस्तक का भी विमोचन किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बुंदेलखंड की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने में यह पहल महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि अब बुंदेलखंड को चीता संरक्षण के नए केंद्र के रूप में भी पहचान मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण के साथ स्थानीय ग्रामीणों की आय बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अभयारण्यों से होने वाली पर्यटन आय में आसपास के ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। इस वर्ष अभयारण्य क्षेत्रों से करीब 80 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होने और इसमें से 20 करोड़ रुपये ग्रामीणों को दिए जाने की जानकारी उन्होंने दी।
उन्होंने बफर जोन के गांवों में होम स्टे को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीणों को दो से तीन लाख रुपये तक का अनुदान देने की बात कही। इसके अलावा वन क्षेत्रों में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने तथा दुग्ध समितियों के माध्यम से किसानों को उचित मूल्य दिलाने पर भी जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों की आजीविका को मजबूत करना है, ताकि जंगल और मानव जीवन दोनों का संतुलित विकास सुनिश्चित हो सके।













