शारदीय नवरात्रि आज से, हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा: डॉ. एन.पी. मिश्र
11 अक्टूबर से शुरू होगी शक्ति की आराधना, 20 अक्टूबर को विजयादशमी; कलश स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:36 से दोपहर 12:24 बजे तक

सिंगरौली। सनातन धर्म में शक्ति की उपासना, श्रद्धा और साधना का महापर्व शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर, रविवार से आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के साथ प्रारंभ होगा। ज्योतिषविद् पं. डॉ. एन.पी. मिश्र, महाप्रबंधक शिवधाम मंदिर वैढ़न के अनुसार, कलश स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:36 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक श्रेष्ठ रहेगा।
डॉ. मिश्र ने बताया कि शारदीय नवरात्रि मां दुर्गा के 9 दिव्य स्वरूपों की आराधना का पर्व है। यह असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस वर्ष मां दुर्गा का आगमन हाथी पर होगा, जिसे अच्छी वर्षा, कृषि उन्नति, सुख-समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।
9 दिनों तक होगी मां के 9 स्वरूपों की पूजा
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कूष्मांडा, पांचवें दिन स्कंदमाता, छठवें दिन कात्यायनी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाएगी। 18 अक्टूबर को दुर्गाष्टमी और 19 अक्टूबर को महानवमी का पर्व मनाया जाएगा। 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ नवरात्रि का समापन होगा।
डॉ. मिश्र ने बताया कि अष्टमी और नवमी की संधि बेला में संधि पूजा का विशेष महत्व है। श्रद्धालु इस दौरान विधि-विधान से मां भगवती की आराधना करते हैं। नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती, देवी कवच और सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ तथा देवी मंत्रों का जाप विशेष महत्व रखता है।
श्रद्धा के साथ सेवा और सदाचार अपनाने का संदेश
डॉ. मिश्र ने कहा कि नवरात्रि केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मशक्ति को पहचानने, विचारों को पवित्र बनाने और जीवन में सकारात्मकता लाने का अवसर है। मां दुर्गा के प्रत्येक स्वरूप से साहस, तपस्या, करुणा, भक्ति और परोपकार की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार पूजा-अर्चना करने तथा जरूरतमंदों की सहायता करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मां भगवती की सच्ची आराधना तभी सार्थक है, जब जीवन में श्रद्धा के साथ संयम, सदाचार और मानवता के भाव भी शामिल हों।













