‘विजुअलाइजिंग द वर्ल्ड विद द पावर ऑफ ट्रुथ’ विषय पर मीडिया कॉन्क्लेव में व्यापक मंथन
शिक्षा महाकुंभ 6.0 के दौरान एनआईटी हमीरपुर में जुटे मीडिया विशेषज्ञ, पत्रकारिता में विश्वसनीयता, जमीनी रिपोर्टिंग और डिजिटल साक्षरता पर हुई चर्चा

हमीरपुर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) हमीरपुर में आयोजित शिक्षा महाकुंभ 6.0 के दौरान मीडिया कॉन्क्लेव में ‘विजुअलाइजिंग द वर्ल्ड विद द पावर ऑफ ट्रुथ’ विषय पर व्यापक मंथन हुआ। कॉन्क्लेव में मीडिया की विश्वसनीयता, तथ्यपरक पत्रकारिता, सूचनाओं के बढ़ते प्रवाह, दुष्प्रचार, डिजिटल साक्षरता और समाधान-केंद्रित पत्रकारिता की आवश्यकता पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।
मुख्य वक्ता इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. डॉ. केजी सुरेश ने कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य केवल किसी मुद्दे पर सक्रियता दिखाना नहीं, बल्कि तथ्यों के आधार पर सत्य को सामने लाना होना चाहिए। उन्होंने कहा, “डोंट बी एक्टिविस्ट, बी फैक्टिविस्ट” अर्थात सक्रियतावादी नहीं, बल्कि तथ्यों पर आधारित पत्रकार बनें।
प्रो. केजी सुरेश ने कहा कि सत्य की व्याख्या अलग-अलग लोगों के लिए अलग हो सकती है, लेकिन पत्रकारिता में तथ्यों और सभी संबंधित पक्षों को उचित स्थान मिलना चाहिए। वर्तमान समय में विश्व स्तर पर विश्वसनीयता का संकट है और मीडिया भी इससे अछूता नहीं है। एक समय था, जब समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों पर लोग सहज विश्वास करते थे, लेकिन आज पाठक समाचारों को संदेह की दृष्टि से देखते हैं। ऐसे में मीडिया को अपनी भूमिका, कार्यशैली और विश्वसनीयता को नए सिरे से मजबूत करना होगा।
उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और वैचारिक मुद्दों पर विमर्श का संघर्ष चल रहा है। चारों ओर सूचनाओं की बाढ़ है और सामग्री का निर्माण तेजी से बढ़ा है। ऐसे वातावरण में सही और गलत सूचना के बीच अंतर करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। मीडिया को तथ्यों की पुष्टि किए बिना अधपकी खबरें परोसने से बचना चाहिए और जमीनी रिपोर्टिंग को प्राथमिकता देनी चाहिए।
प्रो. सुरेश ने कहा कि पत्रकारिता को केवल समस्याओं और कमियों को उजागर करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनके संभावित समाधान भी सामने लाने चाहिए। उन्होंने समाधान-केंद्रित पत्रकारिता को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि मीडिया को आलोचनात्मक दृष्टिकोण के साथ-साथ सकारात्मक बदलाव की संभावनाओं को भी पहचानना होगा।
पत्रकारिता में सामाजिक जिम्मेदारी और नैतिकता जरूरी
विशिष्ट वक्ता के रूप में भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), जम्मू के क्षेत्रीय निदेशक प्रो. दिलीप कुमार ने कहा कि जो ज्ञान में लीन रहता है, वही भारत है। उन्होंने मीडिया की सामाजिक भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि मीडिया में समाज को बनाने और बिगाड़ने, दोनों की क्षमता है। इसलिए पत्रकारिता में तथ्यों की पुष्टि और जिम्मेदारी के साथ उनकी प्रस्तुति अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता को केवल व्यावसायिक लाभ तक सीमित नहीं होना चाहिए। पत्रकार का दायित्व समाज के प्रति भी है। खबर लिखते समय तथ्यों, भाषा और उसके सामाजिक प्रभाव का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा, “पत्रकार बनिए, पत्र के आकार का मत बनिए।” उनके इस कथन के माध्यम से पत्रकारिता के मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारी और पेशेवर नैतिकता पर जोर दिया गया।
माल्यार्पण से शुरुआत, राष्ट्रगान के साथ समापन
मीडिया कॉन्क्लेव का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पार्चन के साथ हुआ। इसके बाद डॉ. बाला लखेंद्र ने स्वागत संबोधन प्रस्तुत करते हुए कॉन्क्लेव के उद्देश्यों और विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में डॉ. योगेश गुप्ता, डॉ. कौशिक और प्रो. दीपक वैष्णव सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। कॉन्क्लेव के दौरान काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार के विद्यार्थियों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। शोध पत्र प्रस्तुत करने वालों में रंजीत कुमार राय, गीतांजलि एम., आदित्य कुमार, मानस राज, प्रियंका यादव, एस. गायत्री, आरती कुमारी और सुष्मिता पांडेय प्रमुख रहे।
कार्यक्रम का संचालन सुष्मिता पांडेय ने किया, जबकि आरती शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कॉन्क्लेव का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए।











