नरवाई प्रबंधन के आधुनिक कृषि यंत्रों की खरीदी पर मिलेगा अनुदान, खेती की लागत होगी कम

सिंगरौली, 12 अक्टूबर 2026। जिले के किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक करने तथा नरवाई जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण, मिट्टी की उर्वरता में कमी और आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए शासन द्वारा आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके तहत हैप्पी सीडर, सुपर सीडर एवं स्मार्ट सीडर की खरीदी पर नियमानुसार अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। इन यंत्रों के उपयोग से धान की कटाई के बाद खेतों में बची नरवाई का उचित प्रबंधन कर रबी फसलों की समय पर बोनी की जा सकती है।सुपर सीडर यंत्र से खेत की जुताई एवं बीज की बुवाई एक साथ की जा सकती है। यह नरवाई एवं फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर जैविक पदार्थ के रूप में उपयोगी बनाने में सहायता करता है। इससे जुताई एवं बुवाई की लागत पारंपरिक विधि की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत तक कम हो सकती है। सुपर सीडर की खरीदी पर शासन के नियमानुसार अधिकतम 1 लाख 20 हजार रुपये तक का अनुदान दिया जाता है।
हैप्पी सीडर जीरो टिलेज तकनीक पर आधारित यंत्र है। इसके माध्यम से खेत में मौजूद नरवाई को काटकर सतह पर बिछाते हुए बिना पारंपरिक जुताई के बीज की बुवाई की जाती है। खेत में बिछी नरवाई मल्चिंग का कार्य करती है, जिससे मिट्टी की नमी बनाए रखने में सहायता मिलती है। इस यंत्र से जुताई एवं बुवाई की लागत पारंपरिक विधि की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत तक कम हो सकती है। हैप्पी सीडर की खरीदी पर अधिकतम 86,350 रुपये तक का अनुदान नियमानुसार उपलब्ध है। इसी प्रकार स्मार्ट सीडर जीरो टिलेज तकनीक पर आधारित आधुनिक कृषि यंत्र है। इसके उपयोग से बीज की कतार में आवश्यक जुताई करते हुए नरवाई को खेत में दबाया जाता है। इससे मिट्टी की नमी संरक्षित रखने तथा फसल अवशेषों का बेहतर प्रबंधन करने में मदद मिलती है। इस यंत्र से जुताई एवं बुवाई की लागत पारंपरिक विधि की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो सकती है। स्मार्ट सीडर की खरीदी पर शासन के नियमानुसार अधिकतम 90,200 रुपये तक का अनुदान उपलब्ध है।
कृषि विभाग के अनुसार, इन यंत्रों पर अनुदान का लाभ लेने के लिए किसानों को विभागीय ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल https://farmer.mp.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन के लिए स्वयं के नाम की भूमि की बी-1, बैंक पासबुक, ट्रैक्टर की आरसी तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के पात्र किसानों के लिए जाति प्रमाण पत्र आवश्यक होगा। इसके साथ आवेदक के स्वयं के बैंक खाते से 4,500 रुपये की धरोहर राशि का डिमांड ड्राफ्ट जमा करना होगा। प्राप्त आवेदनों के आधार पर लक्ष्य निर्धारित कर लॉटरी की सूचना प्रकाशित की जाएगी तथा शासन के नियमानुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी। कृषकों से अपील की गई है कि वे नरवाई जलाने के बजाय आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग कर फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करें। इससे पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, खेती की लागत कम करने तथा फसल की उत्पादकता और आय बढ़ाने में सहायता मिलेगी।











