यूपीआई पेमेंट पर बड़ा फैसला: दिवाली तक टला एमडीआर शुल्क, जानिए कहां लगेगा चार्ज और क्या रहेगा मुफ्त

नई दिल्ली। त्योहारी सीजन से पहले यूपीआई भुगतान को लेकर व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं के बीच शुल्क संबंधी चर्चा तेज हो गई है। पलपल रिपोर्टर की 13 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) लेन-देन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क लागू करने की तारीख दिवाली के बाद तक टाल दी है। नई तारीख अलग से घोषित किए जाने की बात कही गई है।
हालांकि, इस संबंध में एनपीसीआई की आधिकारिक अधिसूचना की पुष्टि जरूरी है। आम ग्राहकों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि व्यापारी से संबंधित शुल्क और ग्राहक द्वारा किए जाने वाले भुगतान पर लगने वाला शुल्क अलग-अलग होते हैं।
किन भुगतानों पर शुल्क लगने की बात कही गई है?
रिपोर्ट में चुनिंदा मर्चेंट भुगतानों के लिए निम्नलिखित शुल्क संरचना का उल्लेख किया गया है।
दो हजार रुपये से अधिक के सामान्य मर्चेंट भुगतान: रिपोर्ट के मुताबिक, निर्धारित श्रेणी के लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क प्रस्तावित है। यह शुल्क व्यापारी से संबंधित होता है और इसका भुगतान ग्राहक से सीधे वसूलना अलग विषय है।
रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, पेट्रोल-डीजल और कृषि क्षेत्र: इन क्षेत्रों में दो हजार रुपये से अधिक के पात्र लेन-देन पर प्रति भुगतान पांच रुपये का निर्धारित शुल्क बताए जाने का उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है।
शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड से जुड़े भुगतान: रिपोर्ट के अनुसार, शेयर ब्रोकर, प्रतिभूतियों और म्यूचुअल फंड से संबंधित कुछ भुगतानों पर 0.02 प्रतिशत शुल्क तथा अधिकतम तीन सौ रुपये की सीमा प्रस्तावित है।
इन दरों और इनके लागू होने की तारीख को संबंधित आधिकारिक दिशा-निर्देशों से मिलान करना आवश्यक है। सभी यूपीआई भुगतानों पर एक समान शुल्क लागू होने का अर्थ इन प्रावधानों से नहीं निकाला जाना चाहिए।
क्या-क्या रहेगा मुफ्त?
व्यक्ति से व्यक्ति को बैंक खाते में भुगतान: दोस्त, रिश्तेदार या किसी अन्य व्यक्ति को यूपीआई के जरिए पैसे भेजने वाले सामान्य पी2पी लेन-देन को रिपोर्ट में मुफ्त बताया गया है।
दो हजार रुपये तक की खरीदारी: रिपोर्ट के अनुसार, निर्धारित पात्रता के तहत दो हजार रुपये तक के मर्चेंट भुगतान पर एमडीआर नहीं लगेगा।
छोटे व्यापारियों को राहत: रिपोर्ट में पी2पीएम श्रेणी के अंतर्गत यूपीआई क्यूआर कोड से हर महीने एक लाख रुपये तक भुगतान स्वीकार करने वाले छोटे व्यापारियों को एमडीआर से छूट का उल्लेख किया गया है। इस छूट की वास्तविक पात्रता और शर्तों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
आम ग्राहकों को क्या समझना चाहिए?
एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है जो निर्धारित डिजिटल भुगतान व्यवस्था में व्यापारी से संबंधित होता है। इसे ग्राहक द्वारा सीधे चुकाए जाने वाले शुल्क के समान नहीं माना जाना चाहिए। किसी व्यापारी को भुगतान करते समय ग्राहक को यह देखना चाहिए कि उससे कोई अतिरिक्त राशि तो नहीं मांगी जा रही है और भुगतान ऐप पर प्रदर्शित रकम सही है या नहीं।
त्योहारी खरीदारी के दौरान यूपीआई का उपयोग पहले की तरह सुविधाजनक रह सकता है, लेकिन शुल्क संबंधी किसी भी नए नियम के बारे में आधिकारिक जानकारी देखना बेहतर होगा। एनपीसीआई या संबंधित बैंक की अधिसूचना से ही यह स्पष्ट होगा कि कौन-सी श्रेणी में शुल्क लागू होगा, किसे छूट मिलेगी और नई व्यवस्था किस तारीख से प्रभावी होगी।
महत्वपूर्ण: यह खबर उपलब्ध कराए गए समाचार-पाठ पर आधारित है। एमडीआर की दरों, दिवाली के बाद लागू होने की तारीख और विभिन्न श्रेणियों की छूट को प्रकाशित करने से पहले एनपीसीआई की आधिकारिक अधिसूचना से सत्यापित कर लें।













