जिले में नहीं होती दूध उत्पादों के सामग्री की सेम्पलिंग…

जिले में नहीं होती दूध उत्पादों के सामग्री की सेम्पलिंग…
खाद्य सुरक्षा अधिकारी जांच में नहीं देते ध्यान…
पोल खोल पोस्ट सीधी
जिले भर में दूध व उससे बने उत्पादों में जमकर मिलावटखोरी हो रही है। स्थिति ये है कि दूध से बने सभी उत्पादों में मिलावटखोरी चरम पर है और जिला मुख्यालय में ही बड़े अधिकारियों के नाक के नीचे कारोबारी खुलेआम बिक्री कर रहे हैं। दूध के नाम पर सफेद पानी बेंचना अब आम बात हो चुकी है। लोग चाय एवं अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए दूध खरीदते हैं। साथ ही यह भी शिकायत करते हैं कि यहां दूध के नाम पर सबसे ज्यादा मिलावटखोरी हो रही है। जिम्मेदार विभाग के अधिकारी कुंभकरणीय निंद्रा में लीन हैं। शहरी क्षेत्र में आसपास के ग्रामीण इलाकों से दूध विक्रेता आधे से ज्यादा पानी मिलाकर दूध बेंचने के लिए आते हैं। उन्हें मालूम है कि जिला मुख्यालय में किसी तरह की जांच न होने के कारण उनके ऊपर कोई कार्रवाई नहीं होगी। खाद्य सामग्रियों में मिलावटखोरी की जांच एवं कार्रवाई का अधिकार खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को मिला है फिर भी दूध से बने उत्पादों में अपमिश्रण का पता लगाने के लिए कोई भी सेम्पलिंग कार्यवाही नहीं की जा रही है। दीपावली का त्यौहार नजदीक है। इसमें सबसे ज्यादा दूध से बने उत्पादों की बिक्री होती है। त्यौहारी सीजन के पूर्व खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा दुकानों में किसी भी तरह की जांच कार्यवाही नहीं की जा रही है। इसी वजह से दूध एवं दूध से बने उत्पादों में जमकर मिलावट खोरी की जा रही है।
अपमिश्रण के चलते दूध एवं दूध से बने उत्पाद कई बार धीमा जहर का काम भी कर रहे हैं।
त्यौहारी सीजन के दौरान और भी बढ़ जाती है मिलावट
जानकारों का कहना है कि वर्तमान में स्थिति ये है कि जिला मुख्यालय में ही जो दूध बिक रहा है वो पूरी तरह से अपमिश्रित है। गांव से दूध लेकर आने वाले लोग पानी में दूध मिलाकर मनमानी कीमतों में बेंच रहे हैं। दूध विक्रेताओं द्वारा बेचने के लिए लिए गए दूध की कभी जांच न होने के कारण वो पूरी तरह से बेखौफ होकर मिलावट खोरी में लिप्त हैं। कई दूध विक्रेता ऐसे भी हैं जिनके द्वारा सिंथेटिक दूध की बिक्री भी लम्बे अर्से से की जा रही है। विक्रेताओं द्वारा दूध के नाम पर खुलेआम सफेद पानी बेंचकर भारी कमाई की जा रही है। दूध बिक्री में लगे लोगों की कमाई इतनी ज्यादा है कि साइकिल में चलने वाले दूध विक्रेता दो-तीन महीने के अंदर ही दो पहिया वाहनों में दूध लेकर आ रहे हैं। इनके द्वारा दूध के नाम पर लोगों के साथ लम्बे समय से धोखाधड़ी की जा रही है। स्थिति यह है कि शहर में वर्तमान में ऐसे कोई भी विक्रेता नहीं मिलेंगे जिनके द्वारा ईमानदारी के साथ अपना कारोबार संचालित किया जा रहा हो। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की मिलीभगत के चलते ही यह सबकुछ हो रहा है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा जिला मुख्यालय में ही जहां कि सैकड़ों विक्रेता दूध की बिक्री करने के लिए आते हैं उनके द्वारा जांच पड़ताल की जरूरत नहीं समझी जा रही है। यदि सप्ताह में दो दिन भी नियमित रूप से दूध विक्रेताओं की जांच शुरू हो जाय तो लोगों को पैसा देने के बाद शुद्ध दूध मिलना सुलभ हो जाएगा। दूध का उपयोग ज्यादातर छोटे बच्चे एवं मरीज करते हैं किन्तु उनको अपमिश्रित दूध से फायदा की वजाय नुकसान होता है।
सीधी शहर में डेयरी उद्योग का कारोबार भी नहीं है। इस वजह से दूध में मिलावट का कारोबार काफी ज्यादा चल रहा है। आज स्थिति ये है कि दूध की बिक्री में लगे लोगों की कई हजारों रुपए महीने की कमाई हो रही है।













