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बैगा विकास प्राधिकरण में शामिल करने की मांग पर कलेक्ट्रेट पहुंचे आदिवासी, पुरानी घोषणाओं पर अमल की उठाई आवाज

सिंगरौली:सीधी और सिंगरौली जिले के बैगा आदिवासियों ने अपने संवैधानिक अधिकारों और विकास योजनाओं के लाभ की मांग को लेकर बुधवार को सिंगरौली कलेक्ट्रेट के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया। कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्र हुए सौ से अधिक बैगा समुदाय के लोगों ने दोनों जिलों को ‘बैगा विकास प्राधिकरण’ के दायरे में शामिल करने और पूर्व में की गई सरकारी घोषणाओं को धरातल पर उतारने की पुरजोर वकालत की।

1 लाख से अधिक आबादी, फिर भी लाभ से वंचित:
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे बैगा समाज के कार्यकारी अध्यक्ष विजय बहादुर ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि सिंगरौली जिले में बैगा समुदाय की आबादी एक लाख से भी अधिक है। इसके बावजूद विंध्य क्षेत्र के इस अंचल को प्राधिकरण के लाभ से दूर रखा गया है, जबकि मध्य प्रदेश के अन्य जिलों में बैगा विकास प्राधिकरण पहले से ही प्रभावी रूप से काम कर रहा है। उन्होंने अफसोस जताया कि सत्तापक्ष हो या विपक्ष, किसी ने भी इस विशेष पिछड़ी जनजाति को मुख्यधारा से जोड़ने और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने कीदिशा में ठोस पहल नहीं की।

मांगपत्र में गिनाईं अधूरी घोषणाएं:
बैगा समाज की ओर से सौंपे गए मांगपत्र में 16 नवंबर 2011, 2 सितंबर 2018, 22 जनवरी 2023, 26 जुलाई 2023, 15 मई 2025 और 15 नवंबर 2025 को शासन स्तर से की गई विभिन्न घोषणाओं का हवाला दिया गया है। समुदाय ने मांग की है कि इन तमाम घोषणाओं की आधिकारिक समीक्षा कराई जाए और समय-सीमा तय कर इन्हें अमल में लाया जाए।

विशेष भर्ती प्रक्रिया व आर्थिक सहायता की मांग:
प्रदर्शनकारियों ने रेखांकित किया कि बैगा समाज आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य, पक्के आवास, सड़क, बिजली, शुद्ध पेयजल और नियमित रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। उन्होंने मांग की कि अन्य प्राधिकरण वाले जिलों की तरह सिंगरौली और सीधी के बैगा युवाओं को भी सीधी ‘विशेष भर्ती प्रक्रिया’ का लाभ दिया जाए और पात्र महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन से दोनों जिलों को अविलंब प्राधिकरण में शामिल कराने हेतु राज्य शासन को आवश्यक प्रस्ताव भेजने का आग्रह किया है।

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