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मनरेगा बनाम ‘वीबी-जी राम जी’ पर संसद में घमासान

29 दिसंबर को स्थायी समिति की बैठक, नए रोजगार कानून पर सियासी टकराव तेज

नई दिल्ली -मनरेगा की जगह लाने जा रहे ‘विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) बिल–2025’ को लेकर राजनीतिक संग्राम तेज हो गया है। ग्रामीण विकास और पंचायती राज पर संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष एवं कांग्रेस सांसद सप्तगिरी शंकर उलाका ने 29 दिसंबर को समिति की अहम बैठक बुलाई है। बैठक में इस नए बिल पर चर्चा और मनरेगा से इसकी तुलना किए जाने का प्रस्ताव है, जिस पर सत्तारूढ़ एनडीए ने कड़ा एतराज जताया है।

एजेंडे पर आपत्ति, एनडीए बोला– यह जल्दबाजी

समिति के एजेंडे में ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से ‘वीबी-जी राम जी बिल’ पर प्रस्तुति और इसे मनरेगा से तुलना करना शामिल है। भाजपा सांसदों का कहना है कि यह बिल अभी राष्ट्रपति की मंजूरी और गजट अधिसूचना का इंतजार कर रहा है, ऐसे में इसे कानून मानकर चर्चा करना अनुचित है। समिति के सदस्य और भाजपा सांसद विवेक ठाकुर ने इसे “विचारहीनता” करार दिया।

राजनीतिकरण का आरोप

एनडीए सांसदों का आरोप है कि यूपीए काल की मनरेगा योजना से नए कानून की तुलना कर मुद्दे का जानबूझकर राजनीतिकरण किया जा रहा है। उनका कहना है कि समिति केवल कानून के क्रियान्वयन की समीक्षा कर सकती है, न कि हाल ही में पारित विधेयक पर इस तरह की बहस। वहीं विपक्ष इसे ग्रामीण रोजगार के भविष्य से जुड़ा अहम मुद्दा बता रहा है।

पहले भी विवादों में रही समिति

यह पहली बार नहीं है जब स्थायी समिति का एजेंडा विवादों में आया हो। जुलाई में भूमि अधिग्रहण कानून की समीक्षा बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर और अभिनेता प्रकाश राज को बुलाने पर भाजपा सांसदों ने विरोध जताते हुए वॉकआउट किया था, जिसके चलते बैठक स्थगित करनी पड़ी थी।

अब देखना होगा कि 29 दिसंबर की बैठक में ‘वीबी-जी राम जी’ बिल पर चर्चा सियासी टकराव को और कितना बढ़ाती है।

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