शहर के पान मसाला कारोबारी के तीन दुकानों पर जीएसटी का छापा…

शहर के पान मसाला कारोबारी के तीन दुकानों पर जीएसटी का छापा…
जीएसटी की टीम को देखकर अन्य व्यापारी भी रहे सकते में…
सीधी
जिला मुख्यालय में पान मसाला कारोबार से जुड़ी बड़ी टैक्स चोरी की आशंका को लेकर स्टेट जीएसटी विभाग ने सख्त कार्रवाई की है।
सीधी शहर के अरविंद गुप्ता पान मसाला विक्रेता, संचालक शालू पान मसाला के यहां कल मंगलवार की सुबह जिला मुख्यालय स्थित तीन ठिकानों पर एक साथ छापेमार कार्रवाई कर विभाग ने लाखों रुपये की टैक्स चोरी के लगे आरोपों की जांच शुरू की है। यह कार्रवाई बड़ी होने के चलते आगामी दिनों में भी लगातार जारी रखने की बात कही जा रही है।
वहीं कल जीएसटी की टीम के पहुंचने पर शहर के अन्य दुकानदारों में भी अफरा-तफरी माहौल देखा गया।
क्या थी कार्रवाई ?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सीधी शहर में संचालित शालू पान मसाला थोक एवं फुटकर विक्रेता द्वारा लंबे समय से बड़े पैमाने पर पान मसाला से जुड़ा हुआ व्यवसाय किया जा रहा था, जिसको लेकर जीएसटी कम जमा करने पर सवालिया निशान लगने के कारण शिकायतें विभाग को मिल रही थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर स्टेट जीएसटी की करीब 12 सदस्यीय टीम ने सुनियोजित रणनीति के तहत सीधी में एक साथ तीन ठिकानों पर दबिश दी।
डिप्टी कमिश्नर स्टेट जीएसटी अमित पटेल के नेतृत्व में एवं शशि भूषण तिवारी राज्य कर अधिकारी के मार्गदर्शन में आरोपी के दुकान, घर एवं एक मुख्य गोदाम को जांच के दायरे में लिया है।
बताया गया कि आरोपी की दुकान जिला मुख्यालय में संकट मोचन हनुमान मंदिर, सोनांचल बस स्टैंड के समीप, गांधी चौक पहुॅच मार्ग में संचालित है एवं लालता चौक से पुराने हनुमान मंदिर पहुॅच मार्ग के समीप मुख्य गोदाम है।
इसके साथ ही जिला मुख्यालय स्थित निवास स्थल पर छापेमारी की गयी। इस दौरान अधिकारियों ने बिक्री, कच्चे माल की खरीद, टैक्स भुगतान और लेखा-जोखा से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं।
जीएसटी टीम ने जप्त किए मोबाइल और डिजिटल रिकॉर्ड
स्टेट जीएसटी टीम ने इसके साथ ही कंपनी के संचालकों और कर्मचारियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड भी कब्जे में लेकर गहन जांच की जा रही है।
स्टेट जीएसटी अधिकारियों का फोकस डिजिटल लेन-देन, फर्जी बिलिंग और वास्तविक उत्पाद व कागजी रिकॉर्ड के बीच अंतर की पड़ताल पर है। जानकारी के मुताबिक उक्त दुकानदार पान मसाला के उत्पाद जिले में सप्लाई की जाती है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कंपनी द्वारा वास्तविक बिक्री से कम बिक्री दर्शाकर और फर्जी बिलों के माध्यम से बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की जा रही थी। अधिकारियों का अनुमान है कि यह कर अपवंचन लाखों रुपये का हो सकता है।













