मध्य प्रदेशसिंगरौली

भाजपा मोरवा मंडल अध्यक्ष पर संकट, पार्टी व पद से हटाने की मांग तेज

 

सिंगरौली-जिले के मोरवा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी की सियासत उस समय गरमा गई, जब मोरवा मंडल अध्यक्ष विनोद सिंह कुरवंशी को पार्टी पद से हटाने की मांग तेज हो गई। मामला अब केवल संगठन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा जोर-शोर से उठाया जा रहा है, जिससे भाजपा की छवि पर प्रतिकूल असर पड़ता दिख रहा है।

जानकारी के अनुसार 26 दिसंबर को एनसीएल मुख्यालय के सामने सत्यनारायण बैस के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई थी। इस मामले में मोरवा मंडल अध्यक्ष विनोद सिंह कुरवंशी सहित आदिल खान, रोहित सिंह चौहान, अमित मोहाली, सिद्धार्थ मोहाली, सादिक तथा वाहन चालक के खिलाफ बीएनएस की धारा 126(2), 115(2), 296(बी), 324(4), 351(3) एवं 3(5) के तहत मोरवा थाने में अपराध पंजीबद्ध किया गया है। फरियादी सत्यनारायण बैस पिता शंकर प्रसाद बैस, उम्र 43 वर्ष, निवासी गदसा (थाना बरगवां) ने मारपीट एवं जान से मारने की धमकी सहित गंभीर आरोप लगाए हैं।

अपराध दर्ज होने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है। स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब किसी पदाधिकारी पर आपराधिक मामला दर्ज हो, तो उसका पद पर बने रहना पार्टी की साख को नुकसान पहुंचाता है, इसी कारण मंडल अध्यक्ष को तत्काल हटाने की मांग उठ रही है।

बैस समाज का खुला विरोध, नेतृत्व पर भी सवाल

इस पूरे प्रकरण में बैस समाज भी खुलकर सामने आ गया है। समाज के लोगों का आरोप है कि उन्हें न्याय नहीं मिल रहा और राजनीतिक संरक्षण के चलते कार्रवाई में देरी हो रही है। बैस समाज को भाजपा का परंपरागत वोट बैंक माना जाता है, ऐसे में यह असंतोष पार्टी के लिए गंभीर संकेत माना जा रहा है।

आरोप है कि मंडल अध्यक्ष को प्रदेश स्तर के कुछ नेताओं का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते अब तक कोई ठोस संगठनात्मक कार्रवाई नहीं की गई। यही वजह है कि अब भाजपा सोशल मीडिया और जनमत के कठघरे में खड़ी नजर आ रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि पार्टी ने शीघ्र कोई स्पष्ट और कड़ा निर्णय नहीं लिया, तो इसका असर आगामी चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है। अब सभी की निगाहें भाजपा नेतृत्व पर टिकी हैं कि वह इस संवेदनशील मामले में क्या कदम उठाता है।

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