सुकमा में माओवादियों का आत्मसमर्पण: 26 कैडरों ने पुलिस के सामने किया समर्पण, सरकार की नीति का असर

सुकमा: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में माओवादियों के खिलाफ एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। बुधवार को 26 माओवादियों, जिनमें सात महिलाएं भी शामिल हैं, ने आत्मसमर्पण कर दिया। ये माओवादी पीएलजीए बटालियन, दक्षिण बस्तर डिवीजन, माड़ डिवीजन और आंध्र-ओडिशा बॉर्डर क्षेत्र में सक्रिय थे। इन पर कुल 64 लाख रुपए का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण सुकमा पुलिस के रक्षित आरक्षी केंद्र में हुआ, जहां पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
आत्मसमर्पण का कारण और सरकार की नीति
यह आत्मसमर्पण छत्तीसगढ़ सरकार की ‘नक्सलवादी आत्मसमर्पण पुनर्वास नीति-2025’ और सुकमा पुलिस के ‘पूना मार्गेम अभियान’ से प्रभावित होकर हुआ। इस अभियान का उद्देश्य है ‘पुनर्वास से पुनर्जीवन’, यानी माओवादियों को मुख्यधारा में लाकर उन्हें समाज में पुनः स्थापित करना। लगातार पुलिस ऑपरेशन्स और नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा कैंपों की स्थापना के कारण माओवादी संगठन कमजोर हो रहा है, और यही कारण है कि कई माओवादी अब हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का रास्ता चुन रहे हैं।
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के बारे में
आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों में विभिन्न रैंक के लोग शामिल हैं, जिनमें एक सीवाईपीसीएम (कंपाउंड कमांडर), एक डीवीसीएम (डिवीजनल कमांडर), तीन पीपीसीएम (पार्टी प्लाटून कमांडर), तीन एसीएम (एरिया कमांडर) और 18 पार्टी मेंबर हैं। ये सभी सुकमा, माड़ क्षेत्र और ओडिशा की सीमा से लगे इलाकों में कई बड़ी वारदातों में शामिल रहे हैं, जिनमें सुरक्षा बलों पर हमले और आईईडी विस्फोट जैसी घटनाएं शामिल हैं, जिनमें कई जवान शहीद हुए थे।
आत्मसमर्पण करने वालों में लाली उर्फ मुचाकी आयते जैसी हाई प्रोफाइल महिला कैडर भी शामिल है, जो एक प्लाटून डिप्टी कमांडर रही और 10 लाख रुपए की इनामी थी। इसके अलावा, हेमला लखमा, आसमिता उर्फ कमलू और कई युवा कैडर भी आत्मसमर्पण करने वालों में शामिल हैं। ये लोग मिलिशिया या पार्टी मेंबर के तौर पर काम कर रहे थे।
सुरक्षा बलों की भूमिका
इस सफलता में डीआरजी सुकमा, इंटेलिजेंस ब्रांच, सीआरपीएफ की विभिन्न बटालियनों और कोबरा की सूचना शाखा का अहम योगदान रहा। इन संस्थाओं ने लगातार सख्त अभियान चलाए, जिससे नक्सलियों को समर्पण का रास्ता अपनाने के लिए प्रेरित किया।
सरकार का प्रोत्साहन
सरकार की नीति के तहत, आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को 50 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि, घोषित इनाम और अन्य सुविधाएं दी जाएंगी। यह कदम न केवल आत्मसमर्पण को बढ़ावा देता है, बल्कि माओवादियों को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
सुकमा पुलिस का संकल्प
सुकमा पुलिस नक्सल मुक्त बस्तर बनाने के संकल्प पर लगातार काम कर रही है। उनकी ओर से चलाए जा रहे अभियान से दूरदराज के जंगली इलाकों में विकास पहुंच रहा है और स्थानीय लोगों के बीच सुरक्षा की भावना मजबूत हो रही है। यह आत्मसमर्पण माओवादी संगठन के अंत की ओर इशारा करता है और बाकी कैडरों से भी अपील की गई है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति और विकास की दिशा में कदम बढ़ाएं।
यह घटनाक्रम न केवल सुकमा जिले के लिए बल्कि पूरे बस्तर क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, जहां माओवादी समस्या को काबू करने और विकास की प्रक्रिया को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।













