हाईकोर्ट से राहत नहीं, जी-2 मॉल पर कार्रवाई की तलवार बरकरार

सिंगरौली। शहर के चर्चित गंगोत्री-2 (जी-2) मॉल के संचालक ताराचंद्र कारीवाल को अवैध निर्माण मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। अदालत ने निर्माण से संबंधित सभी वैध दस्तावेज नगर निगम आयुक्त के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश देते हुए आयुक्त को 60 दिनों के भीतर मामले का निर्णय लेने को कहा है।
नगर निगम सिंगरौली ने भवन निर्माण नियमों के उल्लंघन को लेकर जी-2 मॉल को दूसरी बार नोटिस जारी किया था। निगम के अनुसार मॉल के लिए 1232.92 वर्गमीटर क्षेत्र में निर्माण की अनुमति दी गई थी, जबकि निरीक्षण में लगभग 3840 वर्गमीटर निर्माण पाया गया, जो स्वीकृत क्षेत्रफल से करीब तीन गुना अधिक है।
निगम प्रशासन का कहना है कि 13 मार्च 2024 के संशोधित नियमों के तहत 10 प्रतिशत से अधिक अवैध निर्माण का शमन (रेग्युलराइजेशन) संभव नहीं है। ऐसे में इतने बड़े पैमाने पर किए गए निर्माण को वैध किए जाने की संभावना बेहद कम है।
नगर निगम आयुक्त सविता प्रधान द्वारा जारी नोटिस में मॉल संचालक को निर्धारित समय सीमा के भीतर स्वयं अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं होने पर निगम स्वयं ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा।
निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि अवैध निर्माण हटाने के लिए प्रशासनिक मशीनरी का उपयोग करना पड़ा तो उसका पूरा खर्च संचालक से भू-राजस्व की तरह वसूला जाएगा। कार्रवाई के दौरान उत्पन्न किसी भी स्थिति की जिम्मेदारी भी संबंधित पक्ष की होगी।
हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद अब निगाहें नगर निगम आयुक्त के फैसले पर टिकी हैं। शहर में चर्चा है कि यदि दस्तावेजों के परीक्षण के बाद निर्माण अवैध पाया जाता है तो 60 दिन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मॉल के अवैध हिस्से पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है। नगर निगम की सख्त कार्यशैली को देखते हुए यह मामला आने वाले दिनों में जिले की सबसे चर्चित प्रशासनिक कार्रवाई बन सकता है।











