मध्य प्रदेशसिंगरौली

कृषि विभाग की किसानों से अपील : संतुलित उर्वरक उपयोग से बढ़ाएं उत्पादन एवं मृदा उर्वरता

सिंगरौली, / उप संचालक कृषि मनोज सिंह द्वारा जिले के किसानों से खरीफ फसलों में उर्वरकों का उपयोग अनुशंसित मात्रा एवं वैज्ञानिक सलाह के अनुसार करने की अपील की गई है। विभाग ने कहा है कि किसान भाई केवल डीएपी उर्वरक पर निर्भर न रहें, बल्कि फसल की आवश्यकता के अनुरूप एनपीके कॉम्प्लेक्स उर्वरकों का संतुलित उपयोग करें, जिससे खेती अधिक लाभकारी बनने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहे।

कृषि विभाग के अनुसार एनपीके उर्वरकों में नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P) एवं पोटाश (K) संतुलित मात्रा में उपलब्ध होते हैं। इनका उपयोग करने से पौधों की प्रारंभिक वृद्धि बेहतर होती है, जड़ें मजबूत बनती हैं तथा पौधों की रोग एवं प्रतिकूल मौसम से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। इसके साथ ही फसल की गुणवत्ता एवं उत्पादन में भी वृद्धि होती है।विभाग ने बताया कि डीएपी उर्वरक में मुख्य रूप से नाइट्रोजन एवं फॉस्फोरस उपलब्ध होते हैं, जबकि पोटाश तत्व नहीं होता। इसके विपरीत एनपीके उर्वरकों में तीनों आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध रहते हैं, जिससे पौधों को संतुलित पोषण प्राप्त होता है। लगातार एवं आवश्यकता से अधिक केवल डीएपी के उपयोग से मिट्टी में पोषक तत्वों का असंतुलन उत्पन्न होने की संभावना रहती है, जिससे दीर्घकाल में भूमि की उर्वरता प्रभावित हो सकती है।

कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे फसल की आवश्यकता एवं अनुशंसित मात्रा के अनुसार 12:32:16, 10:26:26 जैसे एनपीके कॉम्प्लेक्स उर्वरकों के साथ यूरिया, पोटाश एवं अन्य उर्वरकों का संतुलित उपयोग करें। साथ ही फॉस्फोरस की पूर्ति के लिए सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) उर्वरक के उपयोग को भी अपनाएं, जो डीएपी की तरह ही उपयोगी एवं लाभकारी है।विभाग ने किसानों से आग्रह किया है कि उर्वरकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग संबंधी किसी भी तकनीकी जानकारी के लिए अपने क्षेत्र के कृषि मैदानी अमले एवं कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से सलाह अवश्य लें।

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