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पाक्सो स्पेशल कोर्ट के आदेश पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और शिष्य के खिलाफ एफआईआर के निर्देश

प्रयागराज। यौन शोषण के आरोपों से जुड़े मामले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बड़ा झटका लगा है। प्रयागराज की पॉक्सो स्पेशल कोर्ट के जज विनोद कुमार चौरसिया ने अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया है।

कोर्ट के आदेश के बाद झूंसी थाना में दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

नाबालिगों के बयान के बाद कोर्ट का फैसला

बताया गया कि 13 फरवरी को आरोप लगाने वाले दोनों नाबालिगों के बयान कोर्ट में वीडियोग्राफी के साथ दर्ज किए गए थे। अदालत ने पुलिस रिपोर्ट को भी संज्ञान में लिया। बयान और रिपोर्ट पर विचार करने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे सुनाते हुए एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए।

आरोप क्या हैं?

श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष और शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी ने 28 जनवरी को अदालत में आवेदन दाखिल कर आरोप लगाया था कि आश्रम में सेवा कर रहे बच्चों के साथ यौन शोषण किया गया।

वादी का दावा है कि माघ मेले के दौरान एक नाबालिग और एक बालिग युवक उनके पास पहुंचे थे। आरोप है कि घटना उस समय की है जब पीड़ित नाबालिग थे। शिकायत में यह भी कहा गया कि गुरु सेवा के नाम पर बच्चों पर संबंध बनाने का दबाव बनाया जाता था।

आशुतोष ब्रह्मचारी ने यह भी आरोप लगाया कि उनके संपर्क में करीब 20 नाबालिग बच्चे हैं, जिनके साथ कथित रूप से दुष्कर्म हुआ। उन्होंने अदालत को कुछ कथित साक्ष्य सौंपने का दावा किया है। पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज न करने पर उन्होंने अदालत की शरण ली थी।

शंकराचार्य का पक्ष

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि गौ-हत्या बंद करने और गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने के उनके अभियान के कारण उन्हें साजिशन फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी प्रमाण अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए हैं और आरोप दुर्भावनापूर्ण हैं।

वहीं, स्वामी मुकुंदानंद गिरी की ओर से 104 पृष्ठों का शपथपत्र दाखिल कर वादी पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज होने का उल्लेख किया गया और आरोपों को झूठा बताया गया है।

आगे की कार्रवाई

कोर्ट के आदेश के बाद अब पुलिस मामले में विधिक प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करेगी। जांच के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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