संजय टाइगर रिजर्व के सीमावर्ती गांवों में टाइगर का आतंक…

संजय टाइगर रिजर्व के सीमावर्ती गांवों में टाइगर का आतंक…
दुबरी कला में स्वास्थ्य केंद्र के सामने रातभर मंडराता रहा बाघ…
एएनएम समेत पूरे गांव ने दहशत में काटी रात…
सीधी पोल खोल पोस्ट
सीधी जिले के संजय टाइगर रिजर्व के सीमावर्ती गांवों में इन दिनों बाघों का खासकर नए शावकों का आतंक देखा जा रहा है। संजय टाइगर रिजर्व के सीमा से लगे गांव के किनारे बसने वाले लोगों में इनका बेहद डरावना आतंक बना हुआ है जबकि गांव के बीच के क्षेत्र में ये बाघ शिकार के फिराक में अपनी उतनी सक्रियता नहीं दिखाते हैं।
क्या हुआ बीते शनिवार की रात ?
जिले के दुबरी कला क्षेत्र में शनिवार की रात रोमांच और दहशत से भरी रही। उप स्वास्थ्य केंद्र दुबरीकला के सामने रात करीब 8 बजे टाइगर का मूवमेंट देखा गया, जिसके बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। स्वास्थ्य केंद्र में ड्यूटी पर मौजूद एएनएम लालबाई बैगा ने पूरी रात डर के साए में गुजारी। बाघ की मौजूदगी से घबराए ग्रामीण भी पूरी रात जागते रहे।
लाइट की चमक में देखा गया बाघ
ग्रामीणों के अनुसार टाइगर स्वास्थ्य केंद्र की लाइट की चमक में साफ दिखाई दिया, जिसकी फोटो भी मौके पर मौजूद लोगों ने मोबाइल में कैद कर ली। इसके बाद स्थानीय लोगों ने साहस दिखाते हुए मिलकर बाघ को रिहायशी इलाके से दूर भगाने का प्रयास किया, हालांकि, खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है।
क्या बताया एएनएम ने ?
एएनएम लालबाई बैगा ने बताया कि शनिवार रात के अलावा रविवार सुबह भी टाइगर को स्वास्थ्य केंद्र और पास के क्षेत्र में घूमते हुए देखा गया। स्थिति को देखते हुए तुरंत वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी गई। इसके बाद विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बाघ को जंगल की ओर खदेड़ने की कोशिश की।
क्या कहते हैं रेंजर ?
वन विभाग के रेंजर विवेक सिंह ने बताया कि दुबरी कला क्षेत्र में टाइगर और उसके शावक का मूवमेंट पिछले 6 दिनों से लगातार जारी है। उन्होंने कहा कि विभाग की टीम हाथियों और अन्य सुरक्षित माध्यमों के जरिए बाघ को रिहायशी क्षेत्र से दूर ले जाने के प्रयास में जुटी है।
रेंजर ने बताया कि जैसे ही मूवमेंट की जानकारी मिलती है, हमारी टीम तुरंत पहुंच जाती है और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास करती है।
दुबरी और बड़काडोल में दिख रही ज्यादा सक्रियता
संजय टाइगर रिजर्व के सीमावर्ती गांव दुबरी एवं बडकाडोल के ग्रामीण रिहायश के आसपास इनदिनों दिन ढ़लने के उपरांत ही टाइगर्स घूमते रहते हैं जो रात में गांव में भी आ जाते हैं।
स्टार समाचार को सूत्रों ने बताया कि टाइगर और उसके शावक रात होते ही जंगल के सीमावर्ती घरों में जहां पालतू पशुओं को बांधा जाता है वहां हमला करने की कोशिश का प्रयास करते हैं।
क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में रात को कोई भी हलचल होने पर कुत्ते भोंकने लगते हैं इस कारण से कुत्तों के भौंकने की आवाज और टाइगर्स के मूवमेंट की जानकारी बनी रहने के कारण इन घरों में रहने वाले लोग तत्काल जाकर ग्रुप में हो हल्ला करते हैं जिसके बाद ये टाइगर्स वहां से वापस चले जाते हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि- चूंकि अभी ये बाघ और उसके शावक आदमखोर नहीं है जिसके कारण वो कोई भी ऐसा बड़ा हमला नहीं करते हैं और कुत्तों के ज्यादा भोंकने पर घरों में रहने वाले ग्रामीणों के हो हल्ला करने के कारण वापस चले जाते हैं परंतु आए दिन इन टाइगर और उसके शावकों को ग्रामीणों द्वारा देखा जा रहा है।
किस क्षेत्र में कौन सा बाघ है सक्रिय ?
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बाघिन टी- 17 के 3 शावक अपनी टेरिटरी बनाने के प्रयास में संजय टाइगर रिजर्व के दुबरी क्षेत्र में इस तरह का मूवमेंट करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
जबकि बाघिन टी- 28 के 4 शावक अपनी टेरिटरी बनाने के प्रयास में बड़काड़ोल में इस तरह का मूवमेंट करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
विभाग के लिए बड़ी चुनौती
ठंडी का असर काफी तेजी से बढ़ रहा है और ऐसे में इन क्षेत्रों में बाघ और शावकों का जिस तरह से मूवमेंट बढ़ रहा है वो संजय टाइगर रिजर्व और वन विभाग सहित इन सीमावर्ती गांव में रहने वाले लोगों के लिए बेहद चिंता का विषय है।
अब देखना बाकी है रहेगा की टाइगर्स की निरंतर प्रतिदिन गांव की तरफ बढ़ रही सक्रियता से किसी बड़े हमले के पूर्व टाइगर रिजर्व प्रशासन और वन विभाग मिलकर अपने संयुक्त प्रयासों से कैसे इस समस्या का निदान कर पाते हैं।













