जिले की सड़कें बनीं गौशाला,सीधी से चुरहट, मझौली, सिहावल तक की सडक़ों पर रात्रि में डेरा जमाए रहते हैं पशु …

जिले की सड़कें बनीं गौशाला,सीधी से चुरहट, मझौली, सिहावल तक की सडक़ों पर रात्रि में डेरा जमाए रहते हैं पशु …
बड़े वाहनों के भिडऩे से मृत हो रहे पशु, छोट वाहन हो रहे दुर्घटनाग्रस्त…
सीधी : आवारा पशुओं की भरमार से सीधी जिले में वाहन चालक भी काफी त्रस्त हैं। हालात ये है कि राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 39 में सीधी से चुरहट तक की पूरी सडक़ में आवारा पशु रात्रि के समय में डेरा जमाए बैठे रहते हैं। यह मार्ग काफी व्यस्त होने के कारण अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं। बड़े वाहनों के भिडऩे के कारण पशुओं की मौत हो जाती है तो कई पशु गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। छोटे वाहन भी रात में आवारा पशुओं के बैठने के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। सीधी जिले में आवारा पशुओं के कारण सबसे ज्यादा सडक़ हादसे हो रहे हैं। दरअसल आवारा पशुओं की भरमार जिले के सभी क्षेत्रों में काफी ज्यादा है। पशुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन उनको सुरक्षित ठिकाना कहीं नहीं मिल रहा है। जो पशुपालक पहले मवेशी रखे हुए थे उनके द्वारा उन्हें ऐरा छोंड़ दिया गया है।
दूध बंद होते ही खदेड़ देते हैं गौ माता को
अब ग्रामीण क्षेत्रों में काफी कम संख्या में लोग ही दूध देने वाले पशुओं को ही रखते हैं। सबसे ज्यादा दुर्दशा गौवंशों की है। गाय यदि दूध देना बंद कर दी तो उसे आवारा छोंड़ दिया जाता है। यदि घूमफिर कर कहीं से अपने पशुपालक के पास गाय पहुंच गई तो उसको डंडो से पीटकर काफी दूर खदेड़ दिया जाता है। सडक़ों में काफी हष्ट-पुष्ट गाय देखी जा सकती हैं। जिनको पशुपालकों द्वारा भगा दिया गया है। बैलों की उपयोगिता ट्रैक्टर से खेतों की जुताई होने के कारण अब पूरी तरह से खत्म हो गई है। इस वजह से हर जगह काफी संख्या में बैल आवारा विचरण करते हुए देखे जा सकते हैं। गौवंशों को ग्रामीण क्षेत्रों में रखने की परंपरा खत्म हो जाने के कारण अब वह कहां जाएं यह बड़ी समस्या है। सरकार द्वारा गौ-शालाओं की व्यवस्था तो बनाई जा रही है लेकिन लाखों की संख्या में आवारा घूम रहे गौ-वंशों के लिए यह संख्या काफी कम है।
जानकारों का मानना है कि पशुपालकों की मनमानी के कारण ही आवारा पशुओं की विकराल समस्या सीधी जिले में निर्मित हुई है। उक्त समस्या का निराकरण जिले में गौशालाओं एवं गौअभ्यारण्यों की संख्या बढ़ाकर हो सकती है।
गौ-अभ्यारण्यों के व्यवस्था की जरूरत
सीधी जिले में लाखों की संख्या में विचरण कर रहे आवारा पशुओं की समस्या से स्थाई रूप से तभी निजात मिल सकता है जब उनके लिए व्यवस्थित इंतजाम शासन की ओर से किए जाएं। सीधी जिले में सोन नदी, गोपद नदी, महान नदी का लंबा तट क्षेत्र मौजूद है।
जानकारों का कहना है कि यदि बड़ी नदियों के तटीय क्षेत्र के समीप गौ-अभ्यारण्यों की व्यवस्था बना दी जाए तो इसे हजारों की संख्या में एक ही स्थान में गौ-वंशों को व्यवस्थित रूप से रखा जा सकता है। गौ-अभ्यारण्यों के अंदर लंबा चारागाह भी उपलब्ध हो। इसके इंतजाम भी प्राथमिकता से किए जाने चाहिए। गौअभ्यारण्यों में देख-रेख के लिए गौसेवकों की व्यवस्था होनी चाहिए। साथ ही किसी भी गौवंश को परेशानी का सामना न करना पड़े इसके लिए भी पर्याप्त इंतजाम होने चाहिए। सप्ताह के प्रत्येक दिन पशु चिकित्सकों की ड्यूटी यहां रहने वाले गौ-वंशों की जांच एवं उपचार के लिए लगाई जानी चाहिए। यदि बड़ी नदी तटों के किनारे कई गौ-अभ्यारण्य बनाए जाएं तो स्थाई रूप से भी पशु चिकित्सकों एवं अन्य अमले की पदस्थापना प्राथमिकता के साथ होनी चाहिए। जिससे बीमार पशुओं को समय पर उपचार की व्यवस्था मिल सके।
सीधी जिले में बड़े गौ-अभ्यारण्यों की व्यवस्था बनानें की मांग काफी समय से की जा रही है। प्रशासन द्वारा भी इस पर आरंभ में अपनी सक्रियता दिखाई गई थी। लेकिन बाद में यह भी ठंडे बस्ते में चला गया। जब तक सीधी जिले में बड़े गौ-अभ्यारण्य संचालित नहीं होंगे आवारा पशुओं की समस्या दूर नहीं हो सकती।
गौ-शालाओं के संचालन में नहीं दिख रही पारदर्शिता
सीधी जिले में करीब डेढ़ दर्जन गौ-शालाओं का संचालन पशु चिकित्सा विभाग की संबद्धता में हो रहा है। गौ-शालाओं के संचालन में कोई भी पारदर्शिता नहीं दिख रही है। सरकारी स्तर पर गौ-शालाओं में बीमार पशुओं की जांच के लिए पशु चिकित्सकों का दौरा भी दिखाया जा रहा है। साथ ही पशुओं की संख्या को लेकर भी झूंठे आंकड़े कागजों में दर्शाए जा रहे हैं। गौ-शालाओं में रहने वाले पशुओं के लिए बजट की व्यवस्था भी दी जा रही है। प्रति पशु 20 रुपए का बजट खुराक के लिए दिया जा रहा है। साथ ही गौ-शालाओं के संचालन में आसपास के रहवासियों को भी आवश्यक मदद लेने को कहा जा रहा है। खरीफ एवं रबी सीजन में फसलों की कटाई एवं गहाई के बाद किसानों के पास जो पैरा एवं भूसा आता है उसको गौ-शालाओं को दान देने के लिए कहा जा रहा है। कुछ जागरुक किसान अपने आस-पास में संचालित गौशालाओं को दान में पैरा एवं भूसा उपलब्ध भी करा रहे हैं। इसमें ग्राम पंचायतों के सहयोग की जरूरत है। ग्राम पंचायतों के नुमाइंदों द्वारा भी गौ-शालाओं के संचालन में जन सहयोग प्रदान करने के लिए अपनी बड़ी जिम्मेदारी का निर्वहन करें जिससे आवारा पशुओं को ज्यादा से ज्यादा संख्या में गौशालाओं में जगह मिल सके।













