छात्रावास में बालिका की सर्प काटने से हुई मौत…

छात्रावास में बालिका की सर्प काटने से हुई मौत…
सड़क के अभाव में अस्पताल देर से पहुंचना बना मौत का कारण…
छात्रावास प्रबंधन पर भी उठ रहे सवाल?
संजय सिंह मझौली सीधी
एक तरफ जहां प्रदेश सरकार एवं केंद्र सरकार के द्वारा सुगम यातायात के लिए तमाम सड़कों का जाल बिछाए जाने का दावा किया जा रहा है लेकिन जब समाज के अंतिम छोर में जीवन यापन करने वाले अनुसूचित जाति या अनुचित जनजाति के परिवारों के बच्चे बच्चियों की मौत का कारण सुगम यातायात ना होना बनता हो तब सारे दावे ढकोसले साबित होने लगते हैं। कुछ इसी तरह का मामला जिले के वनांचल क्षेत्र जनपद पंचायत कुसमी के आदिवासी बालिका छात्रावास खरबर का प्रकाश में आया है जहां छात्रावास में कक्षा 7 में अध्यनरत बालिका पूजा बैगा पिता इंद्रपाल बैगा उम्र 13 वर्ष की मौत सर्प काटने से हो गई जिसमें मौत का कारण सड़क के अभाव में समय पर अस्पताल न पहुंचना माना जा रहा है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक घटना मंगलवार 26 अगस्त को प्रातः 4:00 बजे की बताई जा रही है जब बालिका छात्रावास में अपने चारपाई पर सोई हुई थी और सर्प चारपाई में चढ़कर उसे काट दिया बच्ची द्वारा तत्काल आश्रम के बॉर्डन एवं अन्य बच्चियों को बताया छात्रावास प्रबन्धन द्वारा वाहन की व्यवस्था कर 7:00 बजे सुबह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मझौली लाया गया जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर डॉक्टर द्वारा जिला चिकित्सालय के लिए रेफर कर दिया गया और जहां कुछ देर तक उपचार भी चला लेकिन बालिका को नहीं बचाया जा सका और उसकी मौत हो गई।

क्षेत्र में नहीं है शुगम यातायात सुविधा
बताते चलें कि खरबर से मझौली की दूरी लगभग 25 किलोमीटर है अगर पूर्ण रूप से सड़क बनी होती तो बच्ची को लेकर आधे घंटे में अस्पताल पहुंचाया जा सकता था और समय पर उपचार होता तो शायद उसकी जान भी बच जाती लेकिन नदियों में पुल का ना होना एवं वन मार्ग में खराब सड़क होना जिससे आने में 3 घंटा लग गया यही देरी बालिका के मौत का कारण बना जिसको लेकर क्षेत्र में मातम एवं असंतोष व्याप्त है।
छात्रावास प्रबंधन की भी है खास जिम्मेदारी
छात्रावास एवं आश्रमों के लिए समय-समय पर पर्याप्त बजट जारी किया जाता है ताकि अध्ययन करने वाले बालक बालिकाओं के सुरक्षा में कमी ना हो जिसके लिए 24 घंटे सेवा देने के लिए कर्मचारी तैनात किए गए हैं।समुचित साफ सफाई एवं प्रकाश की व्यवस्था होनी चाहिए, अधीक्षक को नियमित रूप से संस्था में रहना चाहिए,प्राथमिक उपचार के लिए दवा किट भी होना चाहिए, अगर इन सभी बातों का सही तरीके से पालन होता तो शायद ऐसी घटना ना घटती।













