
नई दिल्ली/अबू धाबी। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच खलीफ़ा इकोनॉमिक ज़ोन्स अबू धाबी के पास एक बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में ही मार गिराया गया, लेकिन उसका मलबा जमीन पर गिरने से अफरा-तफरी मच गई। इस घटना में 5 भारतीय नागरिक घायल हो गए, जिनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अबू धाबी की हवाई रक्षा प्रणाली ने समय रहते मिसाइल को इंटरसेप्ट कर लिया, जिससे बड़ा नुकसान टल गया। हालांकि, मिसाइल के टुकड़े जमीन पर गिरने से आसपास मौजूद लोगों के लिए खतरा पैदा हो गया।
औद्योगिक क्षेत्र में बढ़ी चिंता
यह इलाका एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र है, जहां बड़ी संख्या में विदेशी कामगार, खासकर भारतीय नागरिक कार्यरत हैं। ऐसे में मलबे का यहां गिरना सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब किसी मिसाइल को हवा में नष्ट किया जाता है, तो उसके टुकड़े अनियंत्रित तरीके से नीचे गिरते हैं। यही कारण है कि इंटरसेप्शन के बाद भी खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता।
ईरान-इजरायल तनाव का असर
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस तरह की घटनाओं के पीछे ईरान और इज़रायल के बीच बढ़ता तनाव प्रमुख कारण माना जा रहा है, जिसमें अमेरिका की भूमिका भी अहम है। क्षेत्र में लगातार सैन्य गतिविधियों के चलते मिसाइल हमलों और इंटरसेप्शन की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।
सुरक्षा को लेकर नए सवाल
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या केवल मिसाइल को हवा में मार गिराना ही पर्याप्त है, या फिर उसके मलबे से होने वाले खतरे से निपटने के लिए भी अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की जरूरत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो आने वाले समय में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं, जिससे आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता भी गहराती जाएगी।













