एमपी हाई कोर्ट का फैसला: शारीरिक प्रशिक्षण में असफल पुलिस निरीक्षक का तबादला उचित, याचिका खारिज

सिंगरौली- जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि पुलिस विभाग में फील्ड ड्यूटी के लिए शारीरिक रूप से सक्षम होना अनिवार्य है। कोर्ट ने एक कार्यवाहक पुलिस निरीक्षक की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने तबादले को चुनौती दी थी।
मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता कपूर त्रिपाठी, जो सिंगरौली जिले के मोरवा थाने में पदस्थ थे, उन्हें 26 मार्च 2026 को मध्य प्रदेश पुलिस अकादमी भौंरी (भोपाल) स्थानांतरित किया गया था। उन्होंने कोर्ट में दलील दी कि उनका कार्यकाल पूरा नहीं हुआ है और उनका तबादला दुर्भावनापूर्ण तरीके से किया गया है।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि कार्यवाहक निरीक्षक के रूप में पदस्थापना के लिए शारीरिक दक्षता से जुड़ी अनिवार्य ट्रेनिंग पास करना जरूरी था। रिकॉर्ड के अनुसार, याचिकाकर्ता पहले भी प्रशिक्षण परीक्षा में असफल रहे थे और बाद में आयोजित परीक्षा में शामिल नहीं हुए।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस मनिंदर एस. भट्टी की एकल पीठ ने कहा कि जब निरीक्षक पद के लिए शारीरिक प्रशिक्षण अनिवार्य है और याचिकाकर्ता उसमें सफल नहीं हुए, तो उनका तबादला पूरी तरह वैधानिक है।
कोर्ट ने यह भी पाया कि याचिकाकर्ता द्वारा बीमारी का जो दावा किया गया, उसके समर्थन में पर्याप्त मेडिकल प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए गए।
इस आधार पर न्यायालय ने तबादला आदेश में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी और पुलिस स्थापना बोर्ड के निर्णय को सही ठहराया।













