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जबलपुर में 11 हजार टन गेहूं सड़ा, 25 करोड़ का नुकसान; शराब फैक्ट्रियों को बेचने की तैयारी पर उठे सवाल

जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले से भंडारण व्यवस्था में बड़ी लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। सरकारी और निजी गोदामों में रखा करीब 11,731 मीट्रिक टन गेहूं सड़ चुका है, जिसकी कीमत लगभग 25 करोड़ रुपए बताई जा रही है। अब इस खराब अनाज को औने-पौने दाम पर बेचने की तैयारी की खबरों से विवाद और गहरा गया है।

जानकारी के अनुसार मप्र वेयर हाउसिंग एवं लॉजिस्टिक कार्पोरेशन, मप्र सिविल सप्लाई कारपोरेशन और भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में वर्षों से रखा गेहूं नमी और रखरखाव की कमी के कारण खराब हो गया। आरोप है कि 2020-21 से 2023-24 के बीच खरीदा गया यह अनाज समय पर उठाव नहीं होने से सड़ गया।

आंकड़ों के मुताबिक जबलपुर कृषि मंडी में 4954 मीट्रिक टन, शहपुरा में 5502 मीट्रिक टन, सिहोरा में 695 मीट्रिक टन, पाटन में 490 और रिछाई में 90 मीट्रिक टन गेहूं खराब हो चुका है। स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि अनाज को जानबूझकर लंबे समय तक गोदामों में रखा गया, ताकि बाद में उसे ‘खराब’ घोषित कर सस्ते दाम पर बेचा जा सके।

मामले में अधिकारियों का कहना है कि संबंधित गोदाम संचालकों का किराया रोका गया है और नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है, लेकिन इतनी बड़ी आर्थिक क्षति पर यह कार्रवाई नाकाफी मानी जा रही है।

इधर, समर्थन मूल्य पर नई खरीदी जारी है, जिससे व्यवस्था पर सवाल और गंभीर हो गए हैं। पूरे मामले को लेकर जनता में आक्रोश है और उच्चस्तरीय जांच की मांग उठ रही है।

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